
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को मिलने वाले मुफ्त इलाज में सेंधमारी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदेश भर में मुफ्त इलाज के नाम पर धांधली और अनियमितता बरतने वाले चयनित निजी अस्पतालों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में अब तक राज्य स्तर पर कुल 18 अस्पतालों पर कार्रवाई की गाज गिर चुकी है, जिनमें बिलासपुर शहर के दो प्रमुख अस्पताल भी शामिल हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिलासपुर में फर्जीवाड़े का यह खेल यहीं खत्म नहीं हुआ है। मौजूदा स्थिति में शहर के एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग और शासन के रडार पर हैं। मरीजों से मिली शिकायतों और आडिट रिपोर्ट के आधार पर विभाग इन अस्पतालों की पूरी कुंडली तैयार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही गड़बड़ी करने वाले इन अस्पतालों पर एक बार फिर बड़ी गाज गिर सकती है।
शासन स्तर पर गठित विशेष जांच टीम ने जब शहर के अस्पतालों के रिकार्ड खंगाले, तो भारी पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए शहर के केयर एंड क्योर मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल और अशोक प्रसूति मंदिर का पंजीयन आयुष्मान योजना से निरस्त करते हुए उन्हें 3 साल के लिए योजना से सस्पेंड कर दिया गया है।
शासन द्वारा दो अस्पतालों को निलंबित किए जाने और अन्य दर्जनभर अस्पतालों की सूची तैयार होने की खबर से फर्जीवाड़ा करने वाले संचालक अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। कई अस्पताल अब अपने कागजात दुरुस्त करने और साक्ष्य छिपाने की होड़ में लग गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी समिति हर एक संदिग्ध फाइल का गहनता से पुनरीक्षण कर रही है। फर्जी क्लेम उठाने, मरीजों से अतिरिक्त पैसे वसूलने और बिना जरूरत के भर्ती दिखाने जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। यदि कोई भी निजी अस्पताल इलाज के नाम पर धांधली या योजना का दुरुपयोग करता पाया जाता है, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। डा़ अनिल श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत