
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए सभी 259 पटवारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रशासन ने हड़ताली पटवारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए तत्काल काम पर लौटने का फरमान जारी किया है और सभी को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा के एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्र के सभी आंदोलनकारी पटवारियों को नोटिस जारी कर अड़तालीस घंटे के भीतर कार्यभार संभालने के सख्त निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पटवारी अपने हल्का मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा बिना अनुमति हड़ताल पर जाने को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन माना गया है और अनुपस्थिति की अवधि को सेवा में व्यवधान यानी ब्रेक इन सर्विस घोषित करने की चेतावनी दी गई है।
पटवारियों के सामूहिक रूप से काम बंद कर देने के कारण जिले का पूरा राजस्व अमला पूरी तरह ठप हो चुका है। आगामी धान खरीदी से ठीक पहले होने वाला किसान पंजीयन, एग्रीस्टैक प्रमाणीकरण, डिजिटल फसल सर्वे और गिरदावरी का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इसके साथ ही चक्रवाती तूफान से नष्ट हुई फसलों के नुकसान का आकलन भी खटाई में पड़ गया है, जिससे प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा मिलने में भारी अड़चन आ रही है। तहसील कार्यालयों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और जाति, आय व निवास प्रमाणपत्र के कार्य न होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दबाव नहीं बनाएं संवाद करें
जब तक उनकी सभी लंबित और जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाकर आंदोलन समाप्त कराने के बजाय संवाद स्थापित करने की बात कही है।
- ब्रिजेश राजपूत- प्रदेश संयोजक, राजस्व पटवारी संघ
काम पर नहीं लौटे तो कार्रवाई
धान खरीदी और राहत सर्वेक्षण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए समय सीमा में काम पर न लौटने वालों के खिलाफ सख्त सेवा नियमों के तहत कठोर कार्रवाई तय है।
- आकांक्षा त्रिपाठी- एसडीएम