
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बिलासपुर की अदालत ने केवल नामिनी होने के आधार पर मृतक के म्यूचुअल फंड निवेश की पूरी राशि हासिल करने के प्रयास पर अंतरिम रोक लगा दी है। प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी के चतुर्थ अतिरिक्त न्यायाधीश अनुप तिग्गा ने एसबीआइ म्यूचुअल फंड्स प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह मृतक विश्वनाथ साक द्वारा किए गए निवेश की राशि का भुगतान अनावेदक प्रशांत साक को उत्तराधिकार प्रकरण के निराकरण या छह माह, जो भी पहले हो, तक न करे।
यह मामला उत्तराधिकार दावा से संबंधित है। आवेदकगण की ओर से अधिवक्ता नारायण प्रसाद सोनी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 1 एवं 2 के तहत अंतरिम निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत किया था।
आवेदकों ने अदालत को बताया कि स्व. विश्वनाथ साक ने एसबीआइ म्यूचुअल फंड्स में फोलियो नंबर 16245370 के माध्यम से राशि निवेश की थी। उनकी मृत्यु के बाद अनावेदक प्रशांत साक ने नामिनी होने का लाभ उठाते हुए पूरी निवेश राशि अकेले प्राप्त करने का प्रयास किया। आवेदकों ने आशंका जताई कि यदि म्यूचुअल फंड संस्था ने राशि का भुगतान प्रशांत साक को कर दिया, तो उत्तराधिकार विवाद के अंतिम निर्णय से पहले ही निवेश की रकम उनके हाथ से निकल जाएगी।
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भाई-बहनों के बीच का है मामला
अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आवेदकगण और अनावेदक क्रमांक एक प्रशांत साक, स्व. विश्वनाथ साक के भाई-बहन हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि मृतक ने संबंधित म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। अदालत ने अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए आवश्यक प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति तीनों कसौटियों पर विचार किया।
कोर्ट के अनुसार निवेशित राशि पर आवेदकों का भी प्रथम दृष्टया अधिकार दिखाई देता है। अदालत ने आदेश 39 नियम 1 एवं 2 के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए एसबीआइ म्यूचुअल फंड्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान रोकने का निर्देश दिया।