
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत ने थाना सिरगिट्टी से जुड़े बहुचर्चित जानलेवा हमले के मामले में आरोपित रोशन घृतलहरे उर्फ भोला और राजकुमार मिरी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को विधि अनुसार संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका।
मामले में आरोपित रोशन घृतलहरे उर्फ भोला और राजकुमार मिरी के विरुद्ध धारा 307/34, 323/34, 294/34 आईपीसी तथा आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन के अनुसार 30 मार्च 2022 को इंद्रपुरी तिफरा में लक्ष्मण साहू के घर के सामने उसके बच्चे के खेलते समय तेज रफ्तार मोटरसाइकिल चलाने को लेकर विवाद हुआ। शिकायतकर्ता की पत्नी दुर्गा साहू द्वारा टोके जाने के बाद कथित रूप से आरोपी कुछ देर बाद लौटे और मारपीट की। बीच-बचाव करने आए लक्ष्मण साहू पर रोशन द्वारा चाकू से हमला करने का आरोप था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हुआ।
जिरह में गवाह मुकरे, ढह गई अभियोजन की नींव
मुख्य घायल गवाह लक्ष्मण साहू ने घटना और चोट की पुष्टि की, लेकिन आरोपियों की पहचान नहीं की। प्रत्यक्षदर्शी दुर्गा साहू ने भी आरोपियों को पहचानने से इंकार कर दिया, जबकि स्वतंत्र गवाह सपुरा बाई और नीरा यादव मुकर गए। अन्य गवाह प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर पड़ गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह पाया
1. मेडिकल साक्ष्य पर्याप्त नहीं
मेडिकल और चाकू संबंधी रिपोर्ट से केवल चोट लगना सिद्ध हुआ। अदालत ने कहा कि चिकित्सकीय साक्ष्य अकेले यह साबित नहीं कर सकते कि चोट आरोपियों ने पहुंचाई, जब प्रत्यक्षदर्शी गवाह उनकी पहचान ही न करें।
2. चाकू की बरामदगी से आरोप सिद्ध नहीं
पुलिस द्वारा जब्त चाकू की बरामदगी को अदालत ने पर्याप्त नहीं माना। जब्ती के स्वतंत्र गवाह ने समर्थन नहीं किया। इसलिए यह सिद्ध नहीं हो सका कि बरामद चाकू का उपयोग आरोपियों ने ही किया था।
3. आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं हैं। परिणामस्वरूप आरोपी रोशन घृतलहरे उर्फ भोला और राजकुमार मिरी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर बरी कर दिया गया।
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