बिलासपुर: चिकित्सकों ने कहा था सिर्फ 40 फीसदी काम कर रहे फेफड़े; योग साधना ने बनाया नेशनल प्लेयर
पतंजलि विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा डॉ. मोनिका पाठक ने वर्ष 2016 में बिलासपुर में 'शुद्ध योग केंद्र' की स्थापना की, जहां 2 से 80 वर्ष के नागरिक योग द...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 08:23:32 AM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 08:23:32 AM (IST)
डॉ. मोनिका पाठकHighLights
- बिलासपुर को योगमय बनाने का संकल्प हमारा
- 2 वर्ष से लेकर 80 वर्ष सााधक करते है सधना यहां
- विश्व के दो अनूठे पेटेंट और 55 शोध पत्र किए प्रकाशित
बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि): संस्कारधानी बिलासपुर को 'नित्य कर योग, हितकर योग' के मूलमंत्र के साथ निरोगी और योगमय बनाने के अभियान में प्रख्यात योग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका पाठक एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। वर्ष 2016 में देश के प्रतिष्ठित पतंजलि विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने बिलासपुर में 'शुद्ध योग केंद्र' की स्थापना की थी।
तब से लेकर आज तक वे नगर में योग साधना के प्रचार-प्रसार में एकछत्र मिसाल बनी हुई हैं। उनके केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ 2 वर्ष के अबोध बालकों से लेकर 75-80 वर्ष तक के वयोवृद्ध बुजुर्ग न केवल योग की बारीकियां सीख रहे हैं, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। डॉ. मोनिका का दृढ़ संकल्प है कि उनके केंद्र का कोई भी साधक कभी अस्वस्थ होकर अस्पताल न जाए।
शैक्षणिक व अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. मोनिका की उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। विगत 10 वर्षों तक अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में योग अनुदेशक के रूप में सेवाएं देने के बाद वर्तमान में वे आईपीएस गुरुकुल, गनियारी में विभागाध्यक्ष (HOD) के गरिमापूर्ण पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने योग विज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ते हुए विश्व का पहला 'त्राटक स्टैंड' (डिजाइन पेटेंट) और अष्टांग योग के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए 'आठ प्रहर यूटिलिटी पेटेंट' अपने नाम दर्ज कराया है।
इसके साथ ही उनकी 5 ज्ञानवर्धक पुस्तकों का विमोचन हो चुका है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 55 से अधिक शोध पत्र (Research Papers) प्रकाशित हो चुके हैं। बाल्यावस्था से ही योग और ध्यान (मेडिटेशन) को आत्मसात करने वाली डॉ. मोनिका एक प्रोफेशनल क्रिकेटर भी हैं। उन्हें योग की यह अमूल्य विद्या उनके नानाजी, माताजी और पिताजी के कुशल मार्गदर्शन से विरासत के रूप में प्राप्त हुई है।
डॉ. मोनिका पाठक बताती हैं कि 'शुद्ध योग केंद्र' की सफलता के पीछे उनके मुख्य अनुदेशकों मुनमुन केसरी, आहार विशेषज्ञ (डाइटिशियन एक्सपर्ट) मृदुल पाठक, श्रुति मिश्रा, भावना तिवारी, श्वेता सुमन, अनंत, राखी मानिकपुरी और भूपेंद्र का निस्वार्थ समर्पण है। इस केंद्र के माध्यम से कई असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों को नया जीवन मिला है।
योग साधना ने बनाया नेशनल प्लेयर
इसका एक जीवंत उदाहरण वर्ष 2018 में सामने आया, जब नागपुर के चिकित्सकों ने अस्थमा से गंभीर रूप से पीड़ित एक बालक के फेफड़ों की कार्यक्षमता मात्र 40 प्रतिशत बताते हुए हाथ खड़े कर दिए थे। शुद्ध योग केंद्र में प्राणायाम और नियमित आसनों के अभ्यास के चमत्कार से वह बालक न केवल पूर्णतः स्वस्थ हुआ, बल्कि वर्ष 2025 में उसने योग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।
वहीं मार्च 2017 से लगातार केंद्र से जुड़ीं आर्या विश्वकर्मा बताती हैं कि योग साधना से उनका आलस्य दूर हुआ, आंखों की रोशनी (आई साइट) में अभूतपूर्व सुधार हुआ और वे शारीरिक व मानसिक रूप से बेहद सुदृढ़ हो चुकी हैं।