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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! दूसरों के मैरिज रजिस्ट्रेशन व निजी दस्तावेज RTI में नहीं मिलेंगे

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने व्यवस्था दी है कि विवाह पंजीयन आवेदन, जन्मतिथि व पहचान पत्र जैसे निजी दस्तावेज बिना किसी ब...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 09:55:00 AM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 10:35:17 AM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! दूसरों के मैरिज रजिस्ट्रेशन व निजी दस्तावेज RTI में नहीं मिलेंगे
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. मैरिज रजिस्ट्रेशन व निजी दस्तावेज आरटीआई में देना निजता पर हमला।
  2. व्यापक जनहित के बिना थर्ड पार्टी को नहीं मिलेगी गोपनीय जानकारी।
  3. सूचना आयोग को फटकार, 90 दिनों में नई सुनवाई के निर्देश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आरटीआई के तहत तीसरे व्यक्ति द्वारा विवाह पंजीयन से जुड़े दस्तावेज मांगने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कार्यालय में दस्तावेज उपलब्ध होने मात्र से वह सार्वजनिक नहीं हो जाते।

यदि सूचना किसी व्यक्ति की निजी जानकारी से संबंधित है और उसके खुलासे से निजता प्रभावित होने की आशंका है तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत उसे देने से छूट है। हालांकि, बड़े जनहित के आधार पर ऐसी सूचना के खुलासे का रास्ता खुला रह सकता है।


जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने अधिवक्ता डीके सोनी की ओर से दायर तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं का एक साथ निराकरण करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने विवाह पंजीयन से संबंधित जानकारी मांगने वाली डब्ल्यूपीसी क्रमांक 909/2020 और 913/2020 को खारिज कर दिया। वहीं जांच से जुड़े दस्तावेज मांगने वाली डब्ल्यूपीसी क्रमांक 912/2020 को मंजूर करते हुए राज्य सूचना आयोग का आदेश निरस्त कर दिया और मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए आयोग को वापस भेज दिया।

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विवाह पंजीयन के दस्तावेज मांगे थे

याचिकाकर्ता ने सूरजपुर कलेक्टर कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से कपिल देव पैकरा और लवकेश कुमार पैकरा द्वारा विवाह पंजीयन के लिए प्रस्तुत आवेदन, संलग्न दस्तावेज, आदेश पत्र, विज्ञापन और रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी देने के बजाय संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति उचित माध्यम से लेने की बात कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था। प्रथम अपीलीय अधिकारी और राज्य सूचना आयोग ने भी याचिकाकर्ता को तीसरा व्यक्ति मानते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था।

निजी जानकारी में नाम, पता और पहचान दस्तावेज भी शामिल

हाई कोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीयन आवेदन में नाम, उम्र, जन्मतिथि, पता, फोटो, पहचान संबंधी दस्तावेज, शपथपत्र सहित कई व्यक्तिगत जानकारियां होती हैं। ऐसी जानकारी निजी प्रकृति की है। केवल इसलिए कि यह रिकॉर्ड किसी सरकारी प्राधिकरण के पास है, उसे आरटीआई के तहत स्वतः सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता बड़े जनहित का कोई आधार भी नहीं बता सका। ऐसे में धारा 8(1)(जे) के तहत सूचना देने से इनकार उचित है।

जांच के दस्तावेज वाले मामले में आयोग की चूक

तीसरे मामले में याचिकाकर्ता ने डीपीएस तिवारी के खिलाफ शिकायत से संबंधित जांच के दस्तावेज, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने जांच लंबित होने के आधार पर सूचना देने से इनकार किया था। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने निर्धारित समय में निर्णय नहीं लिया। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील की गई। आयोग ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी, लेकिन सूचना देने से इनकार करने के मूल सवाल पर फैसला नहीं किया।

90 दिन में नए सिरे से फैसला करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सूचना आयोग केवल अधिकारियों की प्रक्रियागत चूक पर टिप्पणी करके दूसरी अपील का निपटारा नहीं कर सकता। वह अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है और उसे यह तय करना होगा कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना देने से इनकार करना कानूनन सही था या नहीं। कोर्ट ने आयोग का आदेश निरस्त करते हुए मामले को वापस भेज दिया है। आयोग को सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित करने और प्रमाणित आदेश पेश किए जाने की तारीख से अधिमानतः 90 दिनों के भीतर दूसरी अपील का निराकरण करने कहा गया है।