
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए आगे ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क के खिलाफ बिलासपुर रेंज साइबर थाना ने कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित कमीशन के लालच में बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी से मिली रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
सीएसपी गगन कुमार(आइपीएस) ने बताया कि साइबर ठगी और म्यूल एकाउंट का यह मामला छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की मंगला शाखा में संचालित एक खाते से जुड़ा है। पुलिस को खाते में बड़ी मात्रा में संदिग्ध राशि के लेन-देन की जानकारी मिली थी। जांच में सांवरिया इंटरप्राइजेस के नाम से संचालित खाते में कुछ ही दिनों के भीतर 12 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध लेनदेन का पता चला। इसके बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच टीम ने बैंक स्टेटमेंट, अकाउंट ओपनिंग फार्म, केवाइसी दस्तावेज और अन्य बैंकिंग दस्तावेज खंगाले। इसके साथ ही बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल नंबरों, विभिन्न खातों और आरोपितों के आपसी संपर्कों का तकनीकी जांच की गई। इसी आधार पर अमृत लाल जाट और राहुल जाट (35), निवासी ग्राम घोसला तहसील महिदपुर थाना राघवी जिला उज्जैन मध्यप्रदेश की भूमिका सामने आई। दोनों को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और खातों की जानकारी जुटा रही है।
कार्रवाई में ये रहे शामिल
आइजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में कार्रवाई हुई। नोडल अधिकारी गगन कुमार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, कामिल हक और रेंज साइबर थाना स्टाफ ने जांच की।
म्यूल अकाउंट के जरिए ऐसे चलता है खेल
साइबर अपराधी कमीशन का लालच देकर दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। खाताधारक अपने खाते, मोबाइल नंबर और बैंकिंग साधन उपलब्ध करा देते हैं। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
बदले में खाताधारक को कमीशन दिया जाता है। ऐसे खातों को म्यूल बैंक अकाउंट कहा जाता है। पुलिस के अनुसार इस मामले में भी खातों को उपलब्ध कराने और लेन-देन में इस्तेमाल करने के बदले कमीशन लेने की भूमिका सामने आई है। मामले में इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है।