
नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। कोटा जनपद के ग्राम नवागांव कर्रा में स्वयं सहायता समूह की आधा दर्जन ग्रामीण महिलाएं सामूहिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन चुकी हैं। बिहान योजना के तहत दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं ने गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती के जरिए सालाना 1 लाख 40 हजार रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण अंचलों की महिलाओं के जीवन में खुशहाली का नया सवेरा लेकर आ रहा है। कोटा ब्लाक के नारी शक्ति आजीविका संकुल संगठन चपोरा के तहत आने वाले सिद्धिविनायक महिला ग्राम संगठन की आधा दर्जन सक्रिय सदस्य दीदियों की कहानी बेहद प्रेरणादायी बन चुकी है। समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं ने आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने के लिए सामूहिक रूप से फूलों की खेती करना शुरू किया।
इसके लिए उन्हें समूह के माध्यम से शुरुआती आजीविका गतिविधि के लिए 10 हजार का लोन लेकर कार्य शुरू किया। महिलाओं ने मिलकर अपनी 1 एकड़ भूमि पर 5 हजार गेंदे के पौधे लगाए और कड़ी मेहनत से फूलों की व्यावसायिक खेती शुरू की। शुरुआत में सीमित संसाधनों के कारण कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन महिलाओं की एकजुटता और समूह के सहयोग से यह व्यवसाय लगातार बढ़ता गया।
उनके द्वारा उपजाए गए गेंदे के फूलों की भारी मांग रतनपुर के प्रसिद्ध बजरंगबली मंदिर के साथ-साथ शादियों, कथा-भागवत और स्थानीय धार्मिक आयोजनों में बड़े पैमाने पर है। सीमित लागत में शुरू हुआ यह सामूहिक व्यवसाय ग्रामीण महिलाओं के परिवारों के लिए बंपर आय का स्थायी स्रोत बन चुका है, जिससे समाज में उनका सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ा है।
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रतनपुर बजरंगबली मंदिर और शादियों में सीधी सप्लाई
समूह की दीदियों ने बताया कि उनके बगीचे के ताजे गेंदा फूलों की सबसे ज्यादा खपत रतनपुर बजरंगबली मंदिर में होती है। इसके अलावा शादी-पार्टी, पूजा और कथा-भागवत के आयोजनों के लिए लोग सीधे खेतों में आकर एडवांस बुकिंग कराते हैं, जिससे बिचौलियों से मुक्ति मिली है और पूरा मुनाफा सीधे महिलाओं के खाते में पहुंचता है।
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कम लागत में अधिक मुनाफा
महिलाओं ने बताया कि फुलो मांग हर मौसम में होती है। रतनपुर में मंदिरो की संख्या अधिक है। क्षेत्र में फूलो की खेती कम होती है, पता करने पर मालूम हुई की फुलो की खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक है। वही ज्यादा देखभाल भी नहीं करनी पड़ती है। फुलों की खेती के लिए शुरुआत में पैसों की तंगी के कारण दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह से मिलने वाले 10 हजार रुपये के सामूहिक फंड से काम शुरू किया और आज उनकी आय 1 लाख से अधिक है।