बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के तमाम शिवालयों में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हुई है और भक्त पारंपरिक तरीकों से शिव आराधना में जुटे हुए नजर आ रहे हैं। शहर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध अष्टमुखी शिव मंदिर में लोगों का तांता लगा हुआ है।

आज सावन के पहले सोमवार को प्रदेश की संस्कारधानी बिलासपुर में भी पूरा शहर शिवमय नजर आ रहा है। शहर के तमाम शिवालयों में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हुई है और भक्त पारंपरिक तरीकों से शिव आराधना में जुटे हैं। शहर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध अष्टमुखी शिव मंदिर में लोगों का तांता लगा हुआ है।

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125 साल पुराना है अष्टमुखी मंदिर

अष्टमुखी शिव मंदिर को पंचायती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भक्तों की मानें तो अष्टमुखी शिव के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है। यह मंदिर तकरीबन 125 साल पुराना है। शुरुआती दौर में यह छोटे आकार में था लेकिन अब इसकी भव्यता देखते ही बनती है।

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शिवलिंग के आठ मुख

यहां भगवान शंकर की अष्टमुखी प्रतिमा चैतुरगढ़ से लाई गई थी। तकरीबन 10 फीट ऊंचे इस शिवलिंग में भगवान के आठ मुख हैं, इसलिए इन्हें अष्टमुखी नाम से जाना जाता है। यहां प्रदेशभर से लोग पहुंचते हैं। विशेष आयोजनों पर यहां शिव को लड्डुओं और खीर का भोग लगाया जाता है । भक्तों की मानें तो इस मंदिर में आया भक्त कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता है, सच्चे मन से मांगी गई उसकी तमाम मनोकामनाएं जरूर पूरी होती है।

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