
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। एरमसाही धान संग्रहण केंद्र में पदस्थ कंप्यूटर आपरेटर काशीराम खूंटे ने जेल से छूटने के बाद इंसाफ पाने भटक रहा है। पीड़ित अधिकारियों को लगातार ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि रंजिश के चलते त्रुटिपूर्ण भौतिक सत्यापन कर उसे जबरन 920 क्विंटल और 2300 बोरा धान गबन के झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया, जबकि पंचनामे में कोई शार्टेज नहीं मिली।
सेवा सहकारी समिति मर्यादित एरमसाही के कंप्यूटर आपरेटर काशीराम खूंटे ने, कलेक्टर को आवेदन सौंप बताया कि, समिति प्रभारी रंजीत कुमार लहरे ने दुर्भावनापूर्वक उनके खिलाफ धान गबन की फर्जी शिकायत दर्ज कराई थी। इसी आधार पर 10 दिसंबर 2025 को बिना उचित गणना किए गुपचुप तरीके से अधिकारियों ने त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट तैयार की। इसमें 920 क्विंटल और 2300 बोरा धान कम दर्शाकर पीड़ित को जबरन जेल भिजवा दिया गया।जेल से लगबग तीन माह बाद जब पीड़ित बाहर आया तो उसने अपनी बेगुनाही के पुख्ता सबूत पेश भी पेश कर रहा है बावजूद इसके उसकी कोई सुुनवाई नहीं हो रही है।
आपरेटर ने बताया कि 17 दिसंबर 2025 को एरमसाही, कछार और हरदाडीह ग्राम पंचायतों के सरपंचों, पंचों और ग्रामीणों की मौजूदगी में संग्रहण केंद्र के स्टाक का दोबारा मिलान कर वीडियोग्राफी कराई गई। जमीनी भौतिक सत्यापन के पंचनामे में धान की कोई कमी नहीं पाई गई। आपरेटर काशीराम खूंटे ने शिकायत में उजागर किया कि संस्था प्रबंधक बबलू लहरे और समिति प्रभारी खुद दागदार हैं।
सत्र 2023-2024 में जयराम नगर और एरमसाही समितियों में कुल 51 हजार क्विंटल से अधिक धान की शासकीय क्षति करने के वास्तविक आरोपित ये लोग खुद हैं, जिनकी जांच कमिश्नर स्तर पर लंबित है। खुद को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। पीड़ित ने पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पंचनामा व सूचना के अधिकार तहत मिले दस्तवेज में स्टाक बराबर
पीड़ित आपरेटर के जेल जाने के बाद जब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने धान संग्रहण केंद्र एरमसाही में उपलब्ध कुल स्टाक की दोबारा गिनती करवाई, तो पूरा सच सामने आ गया। वीडियोग्राफी और कंप्यूटर गणना के मिलान में रिकार्ड बिल्कुल सही पाया गया, वही सूचना के अधिकार में मिले दस्तावेज में स्टाक सही पाया गया है जो आपरेटर काशीराम खूंटे को जबरन फंसाने की साजिश को पूरी तरह बयां करता है।
असली आरोपितों पर जांच लंबित
पीड़ित काशीराम खूंटे का आरोप है कि जिन अधिकारियों ने उन पर गबन का आरोप मढ़कर जेल भिजवाया, वे खुद 51 हजार क्विंटल से अधिक धान के बड़े नुकसान के जिम्मेदार हैं। करोड़ों रुपये के शासकीय धान की क्षति करने वाले रसूखदार प्रबंधकों के खिलाफ कमिश्नर कार्यालय में उच्च स्तरीय जांच पहले से ही चल रही है।