
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर के तालापारा, तैबा चौक निवासी उजमा बानो ने रायपुर के टिकरापारा स्थित इदारा-ए-शरिया दारुल कजा से जारी पति के दूसरे तलाक को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। महिला का कहना है कि कथित इस्लामिक अदालत के आदेश के आधार पर उसके पति रजा रहमान ने तलाक की दूसरी कार्रवाई की। हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया इस आदेश को कानूनी रूप से उचित नहीं माना है।
जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए उजमा बानो का अपने पति के साथ वैवाहिक दर्जा बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही पति और दारुल कजा को तलाक के मामले में आगे कोई कार्रवाई करने से रोक दिया है।
उजमा बानो ने याचिका दायर कर दारुल कजा से जारी दूसरे तलाक यानी तलाक-ए-हसन को चुनौती दी है। याचिका में केंद्र के गृह मंत्रालय, राज्य के कानून विभाग, बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों के अलावा दारुल कजा और पति रजा रहमान को पक्षकार बनाया गया है।
याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी और अधिवक्ता महिमा चंद्रा ने कोर्ट को बताया कि तलाक से जुड़े दस्तावेज पर इदारा-ए-शरिया दारुल कजा की मुहर है। उन्होंने दलील दी कि देश के कानून में किसी समानांतर या इस्लामिक अदालत को इस तरह के आदेश जारी करने का अधिकार देने का कोई प्रावधान नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के साल 2022 के एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। इसमें समानांतर न्याय व्यवस्था के रूप में काम करने वाली ऐसी संस्थाओं के अधिकार को लेकर कोर्ट के पहले के रुख का जिक्र किया गया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के बेनजीर हीना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का भी हवाला दिया गया, जिसमें तलाक-ए-हसन से जुड़े विवाद में अंतरिम संरक्षण दिया गया था।
दस्तावेजों और पहले के फैसलों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि महिला के खिलाफ कथित इस्लामिक अदालत से दूसरा तलाक जारी किया गया है और ये आदेश कानूनी रूप से उचित नहीं लगता। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत उजमा बानो का अपने पति रजा रहमान के साथ वैवाहिक दर्जा बनाए रखने का निर्देश दिया। साथ ही दारुल कजा और पति को तलाक से जुड़ी आगे की कोई कार्रवाई करने से रोक दिया।
केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से सरकारी वकीलों ने नोटिस ले लिया है। वहीं दारुल कजा और पति को सामान्य और स्पीड पोस्ट से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।