
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोपका में पानी निकासी की सुविधा न होने से स्कूली बच्चे और शिक्षक पानी से भरे मैदान से गुजरने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, स्कूल का भवन भी जर्जर हो रहा है, जिससे बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है और बच्चों की पढ़ाई ठप हो रही है।
मानसून की शुरुआत के साथ ही मोपका के शासकीय स्कूल में अव्यवस्था का आलम साफ देखा जा सकता है। परिसर में जलभराव की वजह से संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार मौन बैठे हैं। यह स्थिति केवल मोपका की नहीं है, बल्कि पूरे बिलासपुर जिले में स्कूल भवनों के रखरखाव और मरम्मत को लेकर कागजी दावों की पोल खुल गई है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले भर में कुल 300 स्कूल भवन इस समय बेहद जर्जर और खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनमें प्राथमिक स्तर के 257 स्कूल और माध्यमिक स्तर के 43 स्कूल भवन शामिल हैं, जो सीधे तौर पर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। गनीमत है कि हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या यहां शून्य है, वरना संकट और बड़ा होता।

मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है। हर साल बारिश के मौसम में इन जर्जर शालाओं में पढ़ने वाले नौनिहालों और अध्यापन कराने वाले शिक्षकों की जान जोखिम में डाल दी जाती है। छतों से लगातार पानी रिसने के कारण कमरों में बैठना नामुमकिन हो गया है, जिससे मजबूरन छुट्टी करनी पड़ रही है।
जलभराव से बढ़ी मुसीबत, मैदान बना कीचड़ का टापू
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोपका के परिसर में पानी निकासी ठप होने से पूरा मैदान टापू में तब्दील हो चुका है। घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच से होकर छोटे-छोटे बच्चे क्लासरूम तक पहुंचने को विवश हैं। पालकों ने आक्रोश जताते हुए तत्काल ग्राउंड लेवलिंग और नाली निर्माण की मांग की है।
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300 जर्जर स्कूल भवनों में प्राथमिक शालाएं सबसे बदहाल
बिलासपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत डराने वाली है। जिले के कुल 300 जर्जर भवनों में से सबसे ज्यादा 257 प्राथमिक शालाएं हैं, जहां क-क, ख-ख की पढ़ाई करने वाले मासूम बैठते हैं। इसके अलावा 43 माध्यमिक शालाओं की छतें और दीवारें भी जर्जर हैं, जो किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रही हैं।