
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने दुर्ग जिले में करोड़ों रुपये की कथित अवैध अफीम खेती के मामले में जेल में बंद किसान विनायक ताम्रकार को राहत देने से इन्कार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एफआईआर, चार्जशीट, संज्ञान लेने और आरोप तय करने के आदेश को रद करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की पर्याप्तता, भूमि के स्वामित्व, आरोपित की भूमिका और सह-आरोपितों के बयानों की विश्वसनीयता जैसे सवाल तथ्यात्मक विवाद से जुड़े हैं, जिनका फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।
अभियोजन के अनुसार, छह मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली थी कि दुर्ग के ग्राम झेझरी में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकास बिश्नोई को गिरफ्तार किया। एफएसएल जांच में खेत में अफीम के पौधे पाए गए, जिनका कुल वजन करीब 62,424.4 किलोग्राम और अनुमानित कीमत 7.88 करोड़ रुपये बताई गई।
ताम्रकार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई।
तर्क नहीं आया काम
ताम्रकार ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि जिस जमीन पर अफीम की खेती मिली, वह उसके नाम पर नहीं थी और उसके पास से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि धारा 528 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत एफआईआर या आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के मुद्दे साक्ष्य के मूल्यांकन से जुड़े हैं, जिनका परीक्षण ट्रायल कोर्ट में किया जाना है।