बिना ट्रांजिट रिमांड हरियाणा से छत्तीसगढ़ लाना गैरकानूनी, हाई कोर्ट ने हिरासत व रिमांड आदेश को किया रद
बिलासपुर हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा व जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने साइबर ठगी केस के आरोपी जितेश आनंद की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है।
Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 09:02:27 AM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 09:02:27 AM (IST)
HighLights
- बिना ट्रांजिट रिमांड गिरफ्तारी पूरी तरह असंवैधानिक
- पुलिस का 'स्वेच्छा से आने' का दावा खारिज
- निचली अदालत का रिमांड आदेश रद, 5 लाख में रिहाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने साइबर ठगी के एक मामले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने जितेश आनंद उर्फ जीतू की याचिका मंजूर करते हुए कहा कि पुलिस किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य से पकड़कर बिना ट्रांजिट रिमांड के छत्तीसगढ़ नहीं ला सकती। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की 28 जून से 30 जून 2026 तक की हिरासत को गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ माना।
कोर्ट ने अंबिकापुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के 30 जून और तीन जुलाई 2026 के रिमांड आदेश भी रद कर दिए। जितेश आनंद को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है। मामला साइबर थाना, सरगुजा रेंज में दर्ज अपराध क्रमांक 3/2025 से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता ने शेयर बाजार में अधिक पैसा दिलाने का झांसा देकर 21 लाख 15 हजार रुपये की ठगी की शिकायत की थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत अपराध दर्ज किया था।
पुलिस का दावा था कि जितेश अपनी मर्जी से छत्तीसगढ़ आया, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जितेश 28 जून की शाम से पुलिस के नियंत्रण में था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति की आजादी रोक दी जाती है, तभी गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा प्रावधान लागू होते हैं।
हाई कोर्ट ने यह कहा
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(2) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है। पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड नहीं लिया, जिससे उसकी हिरासत कानून के अनुरूप नहीं थी। हाई कोर्ट ने कहा कि अवैध हिरासत पर बाद का रिमांड भी नहीं टिक सकता।