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बिलाईगढ़ में 3.27 करोड़ के जुर्माने का मामला, हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव से पहले के गलत काम भी कार्रवाई के योग्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलाईगढ़ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे को पद से हटाने और अयोग्य घोषित करने के राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 09:23:12 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 09:23:12 PM (IST)
बिलाईगढ़ में 3.27 करोड़ के जुर्माने का मामला, हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव से पहले के गलत काम भी कार्रवाई के योग्य

HighLights

  1. बिलाईगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष की बर्खास्तगी का आदेश हाईकोर्ट में बरकरार।
  2. 57 अवैध प्लॉट काटने और प्रशासनिक असहयोग का लगा था आरोप।
  3. 3.27 करोड़ जुर्माने के खिलाफ कलेक्टर के पास अपील की छूट।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलाईगढ़ नगर पंचायत के अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे को पद से हटाने और आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित करने के राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने माना कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम की धारा 41-ए के तहत की गई कार्रवाई को केवल इस आधार पर अवैध नहीं कहा जा सकता कि आरोपों से जुड़ी कुछ घटनाएं अध्यक्ष चुने जाने से पहले की हैं।

राज्य शासन ने 4 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर दुबे को अध्यक्ष पद से हटाया था। याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि संबंधित जमीनों की खरीद-बिक्री वर्ष 2013 से 2024 के बीच हुई थी, जबकि वे फरवरी 2025 में अध्यक्ष चुने गए थे। उनका यह भी तर्क था कि चुनाव से संबंधित किसी विवाद के लिए अधिनियम की धारा 20 के तहत चुनाव याचिका दायर करने का प्रावधान है।


उन्होंने जांच रिपोर्ट और शिकायत की प्रतियां नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की दलील भी दी। बाक्स 57 प्लॉट काटने का आरोप शासन और अन्य पक्षों की ओर से बताया गया कि जांच में करीब 2.45 हेक्टेयर कृषि भूमि को बिना वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस और भूमि उपयोग परिवर्तन के 57 आवासीय भूखंडों में बांटने का मामला सामने आया। शासन ने यह भी कहा कि अध्यक्ष बनने के बाद दुबे ने संबंधित कार्रवाई में नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी के प्रस्ताव पर अध्यक्ष के रूप में हस्ताक्षर करने से इनकार किया।

धारा 20 और 41-ए के उद्देश्य अलग

हाई कोर्ट के समक्ष शासन की ओर से दलील दी गई कि कार्रवाई जनहित और नगर पंचायत के हित को ध्यान में रखकर की गई थी। अदालत ने मामले में चुनाव को अमान्य करने और निर्वाचित पदाधिकारी को पद से हटाने की कार्रवाई के बीच अंतर पर विचार किया।

याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस दिए जाने, जवाब प्रस्तुत करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर मिलने के तथ्यों को भी ध्यान में रखा गया। हाई कोर्ट ने राज्य शासन का 4 जुलाई 2026 का आदेश बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, मुख्य नगरपालिका अधिकारी के 24 अप्रैल 2026 के आदेश से लगाए गए 3 करोड़ 27 लाख 4 हजार 740 रुपये के जुर्माने के खिलाफ याचिकाकर्ता को कलेक्टर के समक्ष वैधानिक अपील करने की स्वतंत्रता दी गई है। ऐसी अपील पर संबंधित प्राधिकारी को कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना होगा।