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हिरासत में मौत: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को दिया 3 महीने का अतिरिक्त समय, पीड़ित परिवार को 25 लाख मुआवजा

बिलासपुर केंद्रीय जेल में जनवरी 2024 के दौरान बंद श्रवण सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 11:12:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 11:12:01 PM (IST)
हिरासत में मौत: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को दिया 3 महीने का अतिरिक्त समय, पीड़ित परिवार को 25 लाख मुआवजा

HighLights

  1. हिरासत में मौत की जांच के लिए सीबीआई को 3 माह का समय।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने मृतक की पत्नी व बेटियों को 25 लाख मुआवजा दिया।
  3. जनवरी 2024 में बिलासपुर केंद्रीय जेल में हुई थी श्रवण की मौत।

नईदुनिया प्रतिनिध, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में हिरासत के दौरान श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले की जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है। 34 वर्षीय श्रवण की जनवरी 2024 में बिलासपुर केंद्रीय जेल में बंद रहने के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले की जांच सीबीआइ को सौंपते हुए मृतक की पत्नी और बेटियों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को सीलबंद लिफाफे में पेश जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अतिरिक्त समय दिया। मामले की अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।

छह लीटर महुआ शराब के मामले में हुई थी गिरफ्तारी

श्रवण को 18 जनवरी 2024 को सीपत थाने में दर्ज आबकारी मामले में गिरफ्तार किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, उनके पास से महुआ शराब की तीन बोतलें, कुल छह लीटर, जब्त की गई थीं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा गया। तबीयत बिगड़ने पर 21 जनवरी को उन्हें छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जनवरी की सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।


पोस्टमार्टम में सिर की चोट से मौत की आशंका

न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम में सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों का उल्लेख था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हृदय और श्वसन तंत्र के काम करना बंद करने को मौत का कारण बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को जांच सीबीआइ को सौंपते हुए उसके निदेशक को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कराने और जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

पीठ ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। न्यायिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने के स्पष्टीकरण को कोर्ट ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश बताया था। अदालत ने पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों को चार सप्ताह के भीतर 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश भी दिया था। अंतिम मुआवजे की राशि का निर्धारण मामले के अंतिम निर्णय के समय किया जाना है।

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