
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 में राजनांदगांव जिले के मानपुर क्षेत्र में हुई नक्सल मुठभेड़ में शामिल तीन आरक्षकों की आउट ऑफ टर्न पदोन्नति से जुड़ी याचिका का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के लंबित अभ्यावेदन पर कानून और लागू नियमों के अनुरूप विचार कर आदेश की प्रति प्राप्त होने से 150 दिनों के भीतर कारणयुक्त निर्णय पारित करें।
यह याचिका आरक्षक शिवाजी राव आमोड़े, होमेंद्र कुमार साहू और घनश्याम महेश की ओर से दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि वर्ष 2020 में मानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम परदोनी में हुई नक्सल मुठभेड़ के दौरान वे छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम का हिस्सा थे। उनका दावा था कि अभियान के दौरान उन्होंने साहस और वीरता का परिचय दिया, जिसके आधार पर पुलिस रेगुलेशन-70 के तहत उन्हें अगले उच्च पद पर आउट ऑफ टर्न पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में 14 मई 2022 को पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन लंबे समय तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि आउट ऑफ टर्न पदोन्नति के लिए नियमों में स्पष्ट सीमा निर्धारित है। कुल पदोन्नतियों में अधिकतम 10 प्रतिशत पद ही इस श्रेणी के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं। सरकार ने यह भी कहा कि नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी संख्या में जवान शामिल होते हैं, इसलिए सभी प्रतिभागियों को इस आधार पर पदोन्नति देना संभव नहीं है।
राज्य ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि याचिकाकर्ताओं के साहस को देखते हुए उन्हें 26 फरवरी 2022 को नगद पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सीधे पदोन्नति का आदेश देने के बजाय पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव को निर्देश दिया कि वे लंबित अभ्यावेदन पर कानून और लागू नियमों के अनुसार विचार करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी आदेश की प्रति प्राप्त होने के 150 दिनों के भीतर कारणयुक्त और विधिसम्मत निर्णय पारित करे।