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CG में पिता की मौत के सात साल बाद भी नौकरी नहीं, अनुकंपा नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट सख्त; चार महीने का दिया समय

बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों में प्रशासनिक देरी पर सख्त रुख अपनाया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 09:45:55 AM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 11:44:23 AM (IST)
CG में पिता की मौत के सात साल बाद भी नौकरी नहीं, अनुकंपा नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट सख्त; चार महीने का दिया समय
अनुकंपा नियुक्ति में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, चार महीने में फैसला देने के निर्देश (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने चार महीने में फैसला देने कहा
  2. अमिशा समुन्द्रे ने 2022 में आवेदन प्रस्तुत किया था
  3. पिता की 2019 में सेवाकाल के दौरान मृत्यु हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों में प्रशासनिक देरी को लेकर हाई कोर्ट ने समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने राजनांदगांव नगर पालिक निगम के दिवंगत कर्मचारी बीरजू समुन्द्रे की पुत्री अमिशा समुन्द्रे की याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता अमिशा समुन्द्रे (23) राजनांदगांव के स्टेशन पारा वार्ड क्रमांक-11 की निवासी हैं। उनके पिता बीरजू समुन्द्रे नगर पालिक निगम राजनांदगांव में कार्यरत थे। 13 अगस्त 2019 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजरने लगा।


2022 में दिया था आवेदन

परिवार की स्थिति को देखते हुए अमिशा समुन्द्रे ने 26 जुलाई 2022 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, लंबे समय बीतने के बावजूद आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

मामले में अधिवक्ता अंकुश सोनी के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी। याचिका में अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई थी।

निगम ने प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अधिवक्ता मानस बाजपेयी ने अदालत को बताया कि निगम द्वारा प्रकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। दावा अंतिम स्वीकृति के लिए संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, रायपुर को भेजा जा चुका है। वहीं राज्य शासन की ओर से पैनल लायर हरिओम राय ने भी याचिकाकर्ता की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

अदालत ने दिए स्पष्ट निर्देश

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अमिशा समुन्द्रे को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। अदालत ने निर्देश दिए कि आवेदन प्राप्त होने के बाद संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा नगर निगम कमिश्नर नियमों के अनुसार प्रकरण की जांच करें।

साथ ही अधिकतम चार महीने के भीतर कारणयुक्त और अंतिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया। इसी आदेश के साथ हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।