• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • AI बूटकैंप
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

CG News: फर्जी मेडिकल बिल लगाकर निकाले थे 30 लाख रुपये, पांच महीने बाद भी आरोपी के खिलाफ नहीं हुई FIR

बिलासपुर में 30 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में निलंबित शिक्षक साधेलाल पटेल पर पांच महीने बाद भी एफआइआर दर्ज नहीं हुई। विभाग-पुलिस की देरी पर सवाल ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 11:18:42 AM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2026 11:18:42 AM (IST)
CG News: फर्जी मेडिकल बिल लगाकर निकाले थे 30 लाख रुपये, पांच महीने बाद भी आरोपी के खिलाफ नहीं हुई FIR
फर्जी मेडिकल बिल घोटाले का मामला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 30 लाख के फर्जी मेडिकल बिल का मामला।
  2. निलंबन के बाद भी एफआइआर दर्ज नहीं।
  3. मृत शिक्षक के नाम पर बिल बढ़ाया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शिक्षा विभाग में 30 लाख रुपये के चर्चित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में निलंबन की कार्रवाई के पांच महीने बाद भी आरोपित शिक्षक साधेलाल पटेल के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं हो सकी है। बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी का दावा है कि उन्होंने सभी पुख्ता दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं, वहीं पुलिस अब भी जांच का हवाला दे रही है। इस देरी ने विभाग की कार्यप्रणाली और पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिल्हा ब्लाक के ग्राम पौंसरा में पदस्थ संकुल समन्वयक और छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के ब्लाक अध्यक्ष साधेलाल पटेल पर पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने में डाका डालने का गंभीर आरोप है। जांच में खुलासा हुआ था कि साधेलाल ने मृतक सहायक शिक्षक नरेंद्र कुमार चौधरी के नाम पर 33 हजार रुपये के मेडिकल बिल को कूटरचित कर 5.33 लाख रुपये कर दिया और राशि आहरित कर ली। इसके अलावा उन्होंने अपनी पत्नी और स्वयं के नाम पर भी फर्जी बिल लगाकर करीब 30 लाख रुपए का गबन किया।


संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग ने इस कृत्य को गंभीर कदाचार मानते हुए साधेलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर एफआइआर के निर्देश दिए थे। हालांकि, पांच महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी फाइलें दफ्तरों के बीच चक्कर काट रही हैं। बीईओ कार्यालय का कहना है कि उन्होंने गबन से जुड़े सभी कूटरचित दस्तावेज और जांच रिपोर्ट सिटी कोतवाली पुलिस को उपलब्ध करा दी है। अब देखना होगा कि शासन की राशि डकारने वाले इस रसूखदार शिक्षक पर शिकंजा कब कसता है।

हमने अपनी ओर से जांच पूरी कर ली है और साधेलाल पटेल द्वारा किए गए फर्जीवाड़े के सभी मूल दस्तावेज, कूटरचित बिल और संयुक्त संचालक के निर्देश की प्रति सिटी कोतवाली पुलिस को सौंप दी है। विभाग की ओर से एफआइआर के लिए लगातार फालोअप किया जा रहा है।

- भूपेंद्र कौशिक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा

शिक्षा विभाग से प्राप्त दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। चूंकि मामला कूटरचना और वित्तीय गबन से जुड़ा है, इसलिए तकनीकी साक्ष्यों का मिलान अनिवार्य है। जांच अंतिम चरण में है, तथ्यों की पुष्टि होते ही जल्द ही आरोपित के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाएगी।

- देवेश राठौर, थाना प्रभारी सिटी कोतवाली

रिकवरी का नियम नहीं कैसे होगी वसूली

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शिक्षा विभाग के नियमों में गबन की गई इतनी बड़ी राशि की तत्काल रिकवरी का कोई स्पष्ट प्रविधान नहीं है। सामान्यतः ऐसी स्थिति में एफआइआर के बाद कोर्ट के माध्यम से या सेवा समाप्ति की स्थिति में ग्रेच्युटी/पेंशन से कटौती कर वसूली का प्रयास किया जाता है। यदि एफआइआर में देरी होती है, तो आरोपित को अपनी संपत्ति खुर्द-बुर्द करने का मौका मिल सकता है, जिससे शासन की राशि की वसूली मुश्किल हो जाएगी।