
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। जिले में गरीब परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। जिले में 1,400 से अधिक राशन दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी दुकानों की है, जिनके पास खुद का स्थायी भवन नहीं है। कई केंद्र किराए के छोटे और संकरे कमरों में संचालित किए जा रहे हैं। इससे खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण और दुकानों की निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
सहकारी राशन दुकानों के संचालन में सबसे बड़ी समस्या पर्याप्त जगह की है। किराए के भवनों में चलने वाली कई दुकानों में खाद्यान्न रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। सीमित भंडारण क्षमता के कारण एकमुश्त अनाज का स्टाक रखना संचालकों के लिए चुनौती बन जाता है।
बारिश और सीलन के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्याप्त और सुरक्षित भंडारण स्थान नहीं होने के कारण खाद्यान्न खराब होने की आशंका बनी रहती है। इससे सरकारी राशन वितरण व्यवस्था की गुणवत्ता और खाद्यान्न की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सहकारी समितियों के मुताबिक राशन दुकान संचालन के लिए भवन किराए का शासन की ओर से अलग से कोई प्रावधान नहीं है। राशन वितरण के बदले समितियों को मिलने वाले सीमित कमीशन से ही दुकान का किराया, बिजली बिल और पल्लेदारों का खर्च निकालना पड़ता है।
आमदनी के सीमित साधनों के चलते संचालक महंगे और बड़े भवन लेने में सक्षम नहीं होते। यही वजह है कि कई जगहों पर कम किराए वाले छोटे कमरों में राशन दुकानें संचालित की जा रही हैं। ऐसे स्थानों पर पर्याप्त खाद्यान्न रखने और उसे सुरक्षित रखने में परेशानी होती है।
व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि खाद्य विभाग के पास वर्तमान में किराए के भवनों में संचालित राशन दुकानों की संख्या का सटीक और पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। दुकानों की वास्तविक स्थिति और उनके संचालन स्थल का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं होने से विभागीय निगरानी पर भी सवाल उठते हैं। जब विभाग के पास यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कितने केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं, तो इन दुकानों के भौतिक सत्यापन और औचक निरीक्षण की प्रक्रिया पर स्वाभाविक रूप से संशय पैदा होता है।
राशन दुकानों के नियमित निरीक्षण का उद्देश्य खाद्यान्न के स्टाक, वितरण और भंडारण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच करना है। लेकिन किराए की दुकानों का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, छोटे और असुरक्षित भवनों में खाद्यान्न रखने की मजबूरी के बीच बारिश या सीलन से अनाज खराब होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में राशन दुकानों के लिए पर्याप्त भवन, सुरक्षित भंडारण और स्पष्ट रिकॉर्ड की आवश्यकता सामने आ रही है।
सहकारी समितियों को नियमानुसार किराए के भवन में दुकान संचालन की अनुमति है। शासन स्तर से किराए की अलग राशि नहीं मिलती, बल्कि कमीशन से ही व्यवस्था बनाई जाती है। भंडारण क्षमता कम होने पर तुरंत दोबारा राशन आपूर्ति कर हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।
-अमृत कुजूर, जिला खाद्य अधिकारी बिलासपुर