बिलासपुर के नामी कॉलेज के चेयरमैन पर यौन शोषण का बड़ा आरोप, पीड़िता के सनसनीखेज खुलासे
बिलासपुर के NDR कॉलेज सरकंडा के सचिव डीके राय पर महिला प्राध्यापिकाओं ने मानसिक, शारीरिक व लैंगिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला जागृति सहायता समूह की शिकायत पर कलेक्टर के कड़े निर्देश है।
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 04:00:25 PM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 04:00:25 PM (IST)
चित्र इंटरनेट से लिया गयाHighLights
- बिलासपुर के NDR कॉलेज सचिव डीके राय पर यौन शोषण का आरोप।
- महिला प्राध्यापकों ने अभद्रता, अवांछित स्पर्श और धमकी की शिकायत की।
- कलेक्टर तक पहुंची शिकायत, जांच कमेटी गठित, जल्द पहुंचेगी टीम
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नलिनी प्रभा देव प्रसाद राय (एनडीआर.) कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय सरकंडा में कार्यस्थल पर महिलाओं के मानसिक, शारीरिक और लैंगिक उत्पीड़न का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। महिला जागृति सहायता समूह द्वारा 10 अगस्त को की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए, जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास विभाग) ने महाविद्यालय के प्राचार्य और आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को ‘पोश एक्ट 2013’ के तहत निष्पक्ष जांच कर त्वरित रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने भी जांच के आदेश दिए हैं।
शिकायत पत्र के अनुसार, महाविद्यालय के संस्था सचिव डीके राय पर महिला शिक्षिकाओं एवं प्राध्यापिकाओं के साथ लगातार अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप है। पत्र में उल्लेख है कि डीके राय महिला कर्मचारियों के निजी जीवन पर सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं और उन्हें अन्य लोगों के सामने अपमानित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, अनुचित एवं आपत्तिजनक ढंग से स्पर्श करने, बिना उचित नियुक्ति/नियमित वेतन के महीनों काम कराकर अचानक निकाल देने, तथा शासकीय अवकाश के दिनों में जबरन बुलाकर नौकरी से निकालने की धमकियां देने जैसी गंभीर शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। इस प्रताड़ना के विरोध में आवाज उठाने पर पीड़िता महिलाओं को संस्था के खिलाफ कहीं भी शिकायत न करने की धमकियां दी जाती रही हैं।
पूर्व में भी सचिव के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, बिलासपुर ने महाविद्यालय प्रबंधन व आंतरिक शिकायत समिति को पोश एक्ट नियमानुसार जांच के आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई की प्रतिलिपि कलेक्टर, बिलासपुर को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है, ताकि शिकायतकर्ताओं की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहे। जानकारी के मुताबिक कलेक्टर ने भी कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
पोश एक्ट और कानून का सुरक्षा चक्र
कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 हर संस्थान को महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल देने हेतु बाध्य करता है। 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले किसी भी संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का होना अनिवार्य है। कानून के तहत पीड़िता की पहचान गुप्त रखना कानूनी बाध्यता है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता पर किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई या नौकरी से निकालने का दबाव बनाना कानूनी अपराध माना जाता है।
सुरक्षा एवं गोपनीयता का अधिकार
जब भी संस्था प्रमुख या सचिव स्तर के अधिकारी पर आरोप लगते हैं, तो शिकायतकर्ताओं के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए पोश एक्ट में शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने के सख्त प्रावधान हैं। यदि जांच के दौरान आरोपी द्वारा किसी भी गवाह या पीड़िता को डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है, तो प्रशासन के पास आरोपी को जांच पूरी होने तक निलंबित करने या कार्यस्थल से दूर रखने का पूरा अधिकार होता है।