निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी, हाईकोर्ट ने याचिका की निराकृत, बदले गए जांच अधिकारी
निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत पर चल रही विभागीय जांच के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 10:02:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 10:02:51 PM (IST)
HighLights
- निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी।
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला योग प्रशिक्षक की याचिका निराकृत की।
- दीपांशु विजय काबरा जांच अधिकारी और पारुल माथुर प्रस्तुतकर्ता बनीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: निलंबित आइपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत और विभागीय जांच से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रिट याचिका का निराकरण कर दिया है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष राज्य शासन ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद डांगी के विरुद्ध 20 अप्रैल 2026 को आरोप-पत्र जारी किया जा चुका है।
शासन ने विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी में भी बदलाव किया है। महिला की आपत्तियों के बाद 29 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, आइपीएस दीपांशु विजय काबरा को जांच अधिकारी तथा आइपीएस पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बिलासपुर निवासी महिला योग प्रशिक्षक ने पुलिस महानिदेशक के समक्ष शिकायत देकर डांगी पर वर्ष 2017 से 2025 के बीच पद का प्रभाव इस्तेमाल कर प्रताड़ित करने और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। शिकायत में अश्लील संदेश और तस्वीरें भेजने, पति के विरुद्ध लंबित विभागीय जांच के दौरान आईफोन मांगने तथा मनचाही पदस्थापना के बदले पैसे मांगने जैसे आरोप भी शामिल थे। ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं; इन पर विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है।
जांच अधिकारियों पर पक्षपात का लगाया था आरोप
शिकायत की प्रारंभिक जांच के लिए पहले आइपीएस आनंद छाबड़ा और आइपीएस मिलना कुर्रे को जिम्मेदारी दी गई थी। महिला ने अपने अधिवक्ताओं अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि जांच अधिकारियों का रवैया पक्षपातपूर्ण है और डांगी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारियों को बदलने, किसी वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने और डांगी की छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में स्थित संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था।
शासन ने बताया, जारी हो चुका है आरोप-पत्र
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने पक्ष रखा। शासन ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद डांगी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है और 20 अप्रैल 2026 को औपचारिक आरोप-पत्र जारी किया गया था। शासन के अनुसार, मामला अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के कथित उल्लंघन से संबंधित है।
शासन ने यह भी बताया कि विभागीय जांच की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए 29 सितंबर 2026 को संशोधित आदेश जारी किया गया है। इसके तहत 1997 बैच के आइपीएस अधिकारी दीपांशु विजय काबरा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, को जांच अधिकारी बनाया गया है। वहीं, 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी और उप पुलिस महानिरीक्षक पारुल माथुर को प्रशांत अग्रवाल के स्थान पर प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रस्तुतकर्ता अधिकारी विभागीय जांच में शासन की ओर से साक्ष्य और पक्ष प्रस्तुत करता है।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद निराकरण
हाई कोर्ट के समक्ष शासन की ओर से रखे गए कदमों में जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति प्रमुख थी। महिला की शिकायत पर विभागीय कार्रवाई शुरू होने और जांच व्यवस्था में बदलाव की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने याचिका का निराकरण कर दिया। इस आदेश का अर्थ विभागीय जांच में आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित करना नहीं है। आरोप-पत्र जारी होना अनुशासनात्मक कार्यवाही का चरण है; आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और नियमानुसार निर्णय के बाद ही निकलेगा।