
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद (मैट्रीमोनियल अपील) की सुनवाई के दौरान शादी में उपहार के रूप में मिली मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन और आरटीओ टैक्स से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने अनावेदक पति को बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन से संबंधित नियमों, टैक्स और विलंब शुल्क की जानकारी आरटीओ कार्यालय से प्राप्त करने तथा वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण की आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
यह आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने दीप्ति वस्त्रकार बनाम विकास वस्त्रकार मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई में भी दोनों पक्षों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान पति और पत्नी अपने-अपने अधिवक्ताओं के साथ अदालत में उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से अधिवक्ता के.के. देवांगन ने अदालत को बताया कि पति ने शादी में मिले कुछ कीमती बर्तन अब तक वापस नहीं किए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विवाह के समय उपहार में दी गई मोटरसाइकिल पति के नाम पर है और वही उसका उपयोग कर रहे हैं, लेकिन आज तक वाहन का संबंधित आरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया।
पत्नी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि लंबे समय तक बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन चलाने के कारण अब उसके पंजीकरण पर आरटीओ नियमों के तहत टैक्स और विलंब शुल्क (लेट फीस) का भुगतान करना होगा। ऐसे में वाहन का रजिस्ट्रेशन और स्वामित्व हस्तांतरण विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने पति विकास वस्त्रकार को निर्देश दिया कि वह वर्तमान स्थिति के अनुसार आरटीओ कार्यालय से संपर्क कर बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन के पंजीकरण की प्रक्रिया, देय टैक्स और पेनल्टी की जानकारी प्राप्त करें। इसके साथ ही अदालत ने वाहन के स्वामित्व ट्रांसफर से संबंधित सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया।
मामले में पति की ओर से अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में भी पति और पत्नी दोनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। आरटीओ से प्राप्त रिपोर्ट और ट्रांसफर प्रक्रिया की स्थिति के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई करेगी।