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छत्तीसगढ़ में स्थायी जाति प्रमाण पत्र पर हाई कोर्ट का अहम फैसला: 1950 से पहले का दस्तावेज नहीं तो असमर्थता प्रमाणपत्र दें

कोरिया जिले की दुर्गावती भारती के स्थायी जाति प्रमाणपत्र आवेदन पर निर्णय नहीं होने पर हाईकोर्ट ने राहत दी। पिता और भाई को प्रमाणपत्र मिल चुका था, फिर ...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 05:19:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 05:19:46 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में स्थायी जाति प्रमाण पत्र पर हाई कोर्ट का अहम फैसला: 1950 से पहले का दस्तावेज नहीं तो असमर्थता प्रमाणपत्र दें
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. कोरिया की युवती का स्थायी जाति प्रमाणपत्र आवेदन लंबित था।
  2. पिता और भाई को पहले ही मिल चुका है प्रमाणपत्र।
  3. हाईकोर्ट ने 6 महीने में फैसला करने का आदेश दिया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: स्थायी जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बावजूद निर्णय नहीं होने पर कोरिया जिले के जनकपुर निवासी दुर्गावती भारती को हाई कोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने छह अक्टूबर को भारतपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया है कि दुर्गावती के लंबित आवेदन पर छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणन का विनियमन) अधिनियम, 2013 के प्रविधानों के तहत छह महीने के भीतर निर्णय लें।

दुर्गावती भारती ने याचिका में बताया कि उसने स्थायी जाति प्रमाणपत्र के लिए भारतपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष आवेदन किया है। आवेदन के साथ यह भी बताया गया कि उसके पिता और भाई को सक्षम अधिकारी पहले ही स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार अधिकारी की ओर से मौखिक रूप से प्रमाणपत्र जारी करने में असमर्थता जताई गई।


याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि अधिकारी 1950 से पहले का दस्तावेज प्रस्तुत करने पर जोर दे रहे हैं। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता धर्मेश श्रीवास्तव ने कहा कि जब आवेदन पहले से लंबित है तो सक्षम अधिकारी को उस पर अंतिम निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 2013 में सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कानून बनाया है और उसी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन का निराकरण किया जाना है।

दस्तावेज नहीं तो असमर्थता प्रमाणपत्र देने की छूट

हाई कोर्ट ने कहा कि लंबित आवेदन पर संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार निर्णय लें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता के पास सभी आवश्यक प्रमाणपत्र या दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो उसे इसकी असमर्थता का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए। इसके बाद सक्षम अधिकारी उपलब्ध दस्तावेज और कानून में निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर मामले का निर्णय ले सकते हैं।

कोर्ट ने भारतपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह महीने के भीतर उचित निर्णय लेने का निर्देश देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।