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सूचना के अधिकार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; डीएवी स्कूल को आरटीआई से मिली छूट, दंड भी रद

हाईकोर्ट ने कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से जुड़े एक अहम मामले में निजी स्कूलों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें स्कूल को आरटीआई के दायरे में लाने और प्राचार्य को दंडित करने की बात कही गई थी। न्यायाधीश अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने स्पष्ट किया कि डीएवी एक निजी संस्थान है

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 09:16:00 AM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 09:16:00 AM (IST)
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सूचना के अधिकार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; डीएवी स्कूल को आरटीआई से मिली छूट, दंड भी रद
प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को हाईकोर्ट ने किया निरस्त।
  2. डीएवी पब्लिक स्कूल को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा।
  3. डीएवी ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि डीएवी डीएवी पब्लिक स्कूल, जो एक निजी और स्व-वित्तपोषित शिक्षण संस्थान है, उसे ''''सूचना का अधिकार'''' आरटीआई अधिनियम के तहत ''''सार्वजनिक प्राधिकरण'''' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उन आदेशों को निरस्त कर दिया है, जिनमें स्कूल को आरटीआई के दायरे में लाकर उसके प्राचार्य को ''''डीम्ड पीआईओ'''' के रूप में दंडित किया गया था।

यह मामला कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों को चुनौती दी थी। विवाद तब शुरू हुआ जब स्कूल में कार्यरत एक कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बाद, उनके परिजनों ने आरटीआई के तहत स्कूल की आंतरिक कार्यप्रणाली और सेवा मामलों से जुड़ी जानकारी मांगी।


याचिकाकर्ता स्कूल की ओर से तर्क दिया गया कि डीएवी स्कूल एक निजी संस्था है, जिसे ''''दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसाइटी'''' द्वारा संचालित किया जाता है। स्कूल का न तो सरकारीकरण है और न ही इसे सरकार या एसईसीएल एसईसीएल से कोई ''''पर्याप्त वित्तीय सहायता'''' प्राप्त होती है, जो इसे आरटीआई के दायरे में लाए।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने कानूनी बिंदुओं का गहन विश्लेषण किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल अपनी आय स्वयं फीस और अन्य माध्यमों से जुटाता है। एसईसीएल के साथ हुआ समझौता केवल एक अनुबंधात्मक व्यवस्था है, जिसमें एसईसीएल कर्मचारियों के बच्चों की फीस के घाटे की भरपाई की जाती है, जो ''''पर्याप्त वित्तीय सहायता'''' नहीं मानी जा सकती। स्कूल के प्रबंधन, प्रशासन या नीतिगत निर्णयों पर सरकार या किसी सरकारी निकाय का ''''गहरा और व्यापक नियंत्रण'''' नहीं है। आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत ''''सार्वजनिक प्राधिकरण'''' होने के लिए स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्तपोषण अनिवार्य है, जो इस मामले में सिद्ध नहीं होता।

अदालत का निर्णय

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संस्था स्वयं ही ''''सार्वजनिक प्राधिकरण'''' नहीं है, तो उसके प्राचार्य को ''''डीम्ड पीआईओ'''' मानना पूरी तरह से कानून सम्मत नहीं है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उन आदेशों को खारिज कर दिया, जिनमें स्कूल प्रबंधन को आरटीआई के तहत जानकारी देने और दंडित करने का निर्देश दिया गया था।

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