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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से अभ्यर्थियों को लगा झटका, कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड से छूट देने की मांग ठुकराई

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड की अनिवार्य योग्यता से एक बार की छूट देने की मांग करने वाले 65 अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर ...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: manoj dubey
Publish Date: Fri, 21 Aug 2026 09:13:39 PM (IST)Updated Date: Fri, 21 Aug 2026 09:17:32 PM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से अभ्यर्थियों को लगा झटका, कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड से छूट देने की मांग ठुकराई

HighLights

  1. याची बोले- 2019 में कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था
  2. अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट से मांगी थी एक बार की छूट
  3. हाई कोर्ट ने कहा, अदालत अपनी ओर से पात्रता में छूट नहीं दे सकती

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड की अनिवार्य योग्यता से एक बार की छूट देने की मांग करने वाले 65 अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की पात्रता तय करना सरकार और नियम बनाने वाली संस्था का अधिकार है।

कोर्ट अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए अनिवार्य योग्यता को शिथिल नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी कि कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड की योग्यता अब लागू नियमों का हिस्सा है और अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता के बिना भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकते।


2019 में कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था

65 अभ्यर्थियों ने याचिका में बताया था कि वर्ष 2019 में लागू पात्रता व्यवस्था के तहत कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था। बाद में अशोकानंद पटेल व अन्य बनाम राज्य शासन मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पांच फरवरी 2025 को कृषि शिक्षकों को बीएड से मिली छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर दिया था।

इसके बाद राज्य शासन ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड की योग्यता अनिवार्य कर दी।

अभ्यर्थियों ने मांगी थी एक बार की छूट

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि वे पहले से निर्धारित योग्यता के आधार पर कृषि शिक्षक बनने के लिए पात्र थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें बीएड हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। मौजूदा भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी हुआ और आवेदन की अंतिम तारीख दो सितंबर 2026 है।

अभ्यर्थियों ने मांग की थी कि उन्हें इस भर्ती में बीएड के बिना आवेदन और परीक्षा में शामिल होने की एक बार की संक्रमणकालीन छूट दी जाए। सफल होने पर निर्धारित समय के भीतर बीएड हासिल करने की शर्त लगाने का भी अनुरोध किया गया था।

कोर्ट ने कहा- पुरानी छूट ही असंवैधानिक घोषित हो चुकी

हाई कोर्ट ने कहा कि डिवीजन बेंच पहले ही वर्ष 2019 के नियमों में कृषि शिक्षकों के लिए बीएड/डीएड/टीईटी की छूट को असंवैधानिक घोषित कर चुकी है और राज्य सरकार को एनसीटीई विनियम, 2014 के अनुरूप बीएड योग्यता शामिल करने का निर्देश दे चुकी है।

ऐसे में वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित योग्यता के बिना अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल करने की अनुमति देना उसी योग्यता में न्यायिक अपवाद बनाने के समान होगा।

कोर्ट अपनी ओर से पात्रता में छूट नहीं दे सकता

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा नियम निर्धारित करना नियम बनाने वाली संस्था अथवा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट अपनी राय को सरकार के निर्णय के स्थान पर नहीं रख सकता और व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को सुविधा देने के लिए अनिवार्य भर्ती मानदंड में छूट नहीं दे सकता।

कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा यह देखने तक सीमित है कि सरकार का निर्णय मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या असंवैधानिक तो नहीं है। कोर्ट स्वयं कोई नई पात्रता अथवा छूट नहीं बना सकता।

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