दो साल की अवधि पूरी होने से पहले तबादला, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लगाई रोक
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर बोदले के तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। सक्ती से सरगुजा ट्र...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 10:35:16 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 10:35:16 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- हाई कोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी सक्ती के ट्रांसफर आदेश को किया स्थगित।
- दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही जारी कर दिया गया था आदेश।
- मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 29 अक्टूबर 2026 को होगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, सक्ती के पद से किए गए तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता की सक्ती में पदस्थापना को अभी दो साल पूरे नहीं हुए थे। लागू स्थानांतरण नीति में सामान्य तौर पर वर्तमान पदस्थापना स्थल पर दो साल की अवधि पूरी होने से पहले कर्मचारी का तबादला नहीं करने का प्रावधान है।
मामला सुधाकर बोदले विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन का है। मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन तांबोली और शासन की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता के.जी. यादव उपस्थित हुए।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सुधाकर बोदले को 7 नवंबर 2025 के आदेश से जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था और इसी के साथ उनकी पदस्थापना सक्ती जिले में की गई थी। उन्होंने सक्ती में पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को जारी आदेश के जरिए उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी, सक्ती से हटाकर उप संचालक, क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान, सरगुजा के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया।
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नीति में दो साल से पहले तबादले पर सामान्य रोक
याचिकाकर्ता ने लागू स्थानांतरण नीति के खंड 3.10 का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी को सामान्य परिस्थितियों में वर्तमान पदस्थापना स्थल पर दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। सक्ती में उनकी पदस्थापना 7 नवंबर 2025 को हुई थी और 1 सितंबर 2026 का तबादला आदेश करीब 10 महीने में ही जारी कर दिया गया। ऐसे में याचिकाकर्ता ने तबादले को स्थानांतरण नीति के विपरीत बताते हुए चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने माना- अंतरिम संरक्षण जरूरी
कोर्ट ने दलीलों पर विचार करते हुए विशेष रूप से यह तथ्य देखा कि याचिकाकर्ता की सक्ती में पदस्थापना को दो साल की अवधि पूरी होने से पहले ही तबादला आदेश जारी कर दिया गया। इस आधार पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अंतरिम संरक्षण देना उचित माना। हाई कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 के तबादला आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह रोक फिलहाल याचिकाकर्ता सुधाकर बोदले से संबंधित है।
प्रतिवादियों को नोटिस, 29 अक्टूबर को सुनवाई
कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। शासन की ओर से प्रतिवादी क्रमांक 1 से 3 की ओर से नोटिस स्वीकार कर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। प्रतिवादी क्रमांक 4 को सात दिनों के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। अंतरिम राहत से संबंधित आवेदन पर भी नोटिस जारी किया गया है।मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।