
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में पदस्थ उप अभियंता दिलहरण टंडन को तबादले के खिलाफ अभ्यावेदन देने की छूट दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 12 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता राज्य की स्थानांतरण नीति के तहत गठित सक्षम समिति के समक्ष 10 दिन के भीतर नया अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। समिति को अभ्यावेदन मिलने के 25 दिन के भीतर नियमानुसार कारण सहित निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दिलहरण टंडन की नियुक्ति 24 अगस्त 2011 को परियोजना क्रियान्वयन इकाई, बलरामपुर में उप अभियंता के पद पर हुई थी। इसके बाद उनका स्थानांतरण कोरिया और फिर अंबिकापुर किया गया।
30 सितंबर 2022 के आदेश से उन्हें अंबिकापुर से बिलासपुर स्थित परियोजना क्रियान्वयन इकाई में पदस्थ किया गया, जहां वह काम कर रहे हैं। एक अक्टूबर 2026 के आदेश से उनका फिर अंबिकापुर तबादला कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी पत्नी अर्चना टंडन तंत्रिका संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं और बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में नियमित उपचार करा रही हैं। उनके दो नाबालिग बच्चे भी बिलासपुर में दूसरी और तीसरी कक्षा में पढ़ते हैं। ऐसे में तबादले से परिवार के इलाज और बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
राज्य शासन के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया, लेकिन कहा कि यदि उप अभियंता स्थानांतरण नीति के खंड 8 के तहत गठित समिति के सामने अभ्यावेदन देते हैं, तो उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना याचिका का निराकरण कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 10 दिन में अभ्यावेदन प्रस्तुत करने पर समिति उस पर लागू स्थानांतरण नीति के अनुसार विचार कर यथासंभव 25 दिन में कारण सहित आदेश पारित करे। तबादला रद्द करने या बिलासपुर में ही पदस्थ रखने का कोई अंतिम आदेश हाई कोर्ट ने नहीं दिया है।