सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के लिए बेंच कोटे से इन तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम की अनुशंसा की है। इससे हाई कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक कार्यों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
बार कोटे से भी नामों पर जल्द विचार की संभावना
हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए बेंच और बार कोटे से पांच-पांच नामों का प्रस्ताव कॉलेजियम को भेजे जाने की जानकारी है। कॉलेजियम ने फिलहाल बेंच कोटे से तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम को मंजूरी दी है। अब बार कोटे से भेजे गए अधिवक्ताओं के नामों पर भी कॉलेजियम के स्तर पर विचार होने की संभावना है।
सुषमा सावंत: न्यायिक प्रशासन के कई महत्वपूर्ण पदों का अनुभव
सुषमा सावंत ने उच्च न्यायिक सेवा में रहते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। वह महासमुंद, बिलासपुर और राजनांदगांव में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में न्यायिक प्रशासन का दायित्व निभा चुकी हैं।
इसके अलावा वह छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की निदेशक, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय बिलासपुर और अतिरिक्त सचिव, विधि एवं विधायी कार्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। वर्तमान में वह प्रधान सचिव, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के पद पर कार्यरत हैं।
सुधीर कुमार: जिला अदालत से हाई कोर्ट प्रशासन तक लंबा अनुभव
सुधीर कुमार के पास जिला न्यायालयों के साथ-साथ हाई कोर्ट प्रशासन और न्यायिक अकादमी में काम करने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने बिलासपुर, जशपुर, कोरबा, महासमुंद, दंतेवाड़ा, धमतरी, दुर्ग और रायपुर सहित विभिन्न स्थानों पर न्यायिक दायित्व संभाले हैं।
उन्होंने प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय, विशेष न्यायालय सहित विभिन्न न्यायिक पदों पर काम किया है। इसके अलावा विजिलेंस, अनुशासनात्मक कार्यवाही और प्रशासनिक दायित्वों का भी अनुभव है। लोक सेवा आयोग में विधिक सलाह देने के साथ न्यायिक अकादमी और हाई कोर्ट प्रशासन में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता बीए, एलएलबी है।
संतोष शर्मा: 2009 में सीधे उच्च न्यायिक सेवा में हुए थे शामिल
संतोष शर्मा मूल रूप से सीहोर, मध्य प्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने 19 मार्च 2009 को सीधे उच्च न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। वर्तमान में वह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोरबा के पद पर कार्यरत हैं।
उनकी शैक्षणिक योग्यता बीएससी, एमएससी (जूलॉजी), एलएलबी और एमए (समाजशास्त्र) है। 16 वर्ष से अधिक के न्यायिक अनुभव के दौरान उन्होंने बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, रायपुर, सूरजपुर और कोरबा में अलग-अलग न्यायिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।
बिलासपुर हाई कोर्ट में वह रजिस्ट्रार (एसएंडए) और रजिस्ट्रार (विजिलेंस) के पद पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा अंबिकापुर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े मामलों के विशेष न्यायाधीश, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा सूरजपुर में कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
तीनों अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया राष्ट्रपति की स्वीकृति और इसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने के साथ पूरी होगी।