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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; पत्नी की हत्या के दोषी पति की उम्रकैद को 10 साल में बदला

जशपुर जिले के ग्राम बेने चटकपुर में पत्नी की हत्या के मामले में हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी पहरु राम ने यह अपराध गुस्से में आकर किया था, न कि किसी सोची-समझी साजिश के तहत।

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 03:56:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 03:56:04 PM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; पत्नी की हत्या के दोषी पति की उम्रकैद को 10 साल में बदला
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. हाई कोर्ट की खंडपीठ का अहम फैसला।
  2. आवेश में की गई हत्या; हाई कोर्ट ने सजा में दी राहत।
  3. धारा 302 को 304 भाग-1 में तब्दील किया।

नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपनी पत्नी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या करने वाले एक पति की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पाया कि आरोपी ने यह अपराध गुस्से और आवेश में किया था, न कि पूर्व नियोजित योजना के तहत।

अदालत ने आरोपी की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) से बदलकर धारा 304 भाग-1 (गैर-इरादतन हत्या) में तब्दील करते हुए उसे 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला जशपुर जिले के ग्राम बेने चटकपुर का है। याचिकाकर्ता पहरु राम की पत्नी तारामुनी बाई 2 जून 2022 को बिना बताए कहीं चली गई थी।


चार दिन बाद लौटने पर जब पति ने पूछा, तो पत्नी ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर गुस्से में आकर पहरु राम ने लकड़ी के डंडे से उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने पहरु राम को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतका और आरोपी की बेटी की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। अदालत ने आरोपी की सजा को संशोधित करते हुए उसे 10 साल की कैद की सजा सुनाई है।

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पत्नी की हत्या के दोषी की समय पूर्व रिहाई की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे उत्तम कुमार सोनी की समय पूर्व रिहाई की अर्जी खारिज करने के राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने सुधारात्मक न्याय प्रणाली और कैदी के अच्छे आचरण को प्राथमिकता देते हुए उसे तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय महासमुंद निवासी उत्तम कुमार सोनी द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई के बाद सुनाया।

उत्तम कुमार सोनी को 18 सितंबर 2012 को दोषी ठहराया गया था। वह 13 सितंबर 2011 से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद था और मई 2026 तक उसने 19 वर्ष से अधिक की सजा पूरी कर ली थी। छत्तीसगढ़ जेल नियमों के तहत, ट्रायल कोर्ट ने उसकी रिहाई के लिए अनापत्ति दी थी, लेकिन राज्य सरकार ने उसे गंभीर अपराध का हवाला देकर रिहाई से वंचित रखा।]

हाईकोर्ट ने इस आदेश को अवैध ठहराते हुए कहा कि केवल अपराध की गंभीरता को आधार बनाकर रिहाई रोकना उचित नहीं है। अदालत ने सुधारात्मक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी और निर्देश दिया कि उत्तम कुमार सोनी को तत्काल रिहा किया जाए।

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