
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सहपाठियों से मारपीट के कारण स्कूल में पढ़ाई जारी रखने से रोके गए नाबालिग छात्रों के भविष्य को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत संवैधानिक अधिकार है।
हालांकि छात्रों को उसी स्कूल में पढ़ाना उचित नहीं माना गया है, लेकिन उनकी शिक्षा रोकने के बजाय किसी नजदीकी जवाहर नवोदय विद्यालय में स्थानांतरण का रास्ता तलाशने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने नाबालिग छात्रों की की याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाहर नवोदय विद्यालय समिति, क्षेत्रीय कार्यालय भुवनेश्वर के आयुक्त को मामले पर विचार कर 15 दिन के भीतर उचित आदेश अथवा जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आदेश में कहा कि नाबालिग छात्र याचिकाकर्ताओं को अपने सहपाठियों के साथ मारपीट करने के कारण उसी स्कूल में पढ़ाई जारी रखने से रोका गया है।
कोर्ट के समक्ष इस संबंध में रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट के अनुसार इन छात्रों को उसी स्कूल में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने अनुशासन के इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया, लेकिन साथ ही छात्रों की कम उम्र और उनके भविष्य को देखते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि विवाद के कारण उनकी शिक्षा पूरी तरह बाधित न हो।
मामले में पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, चिसदा, जिला सक्ती के प्रधानाचार्य ने 21 जुलाई 2026 को जवाहर नवोदय विद्यालय समिति, क्षेत्रीय कार्यालय भुवनेश्वर के आयुक्त को पत्र भेजा था। इसमें छात्रों को किसी नजदीकी जवाहर नवोदय विद्यालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था।
हाई कोर्ट ने आयुक्त को इस पत्र पर विचार कर छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित स्कूल को छात्रों को किसी नजदीकी नवोदय विद्यालय में स्थानांतरित करने की अनुमति देने के संबंध में भी निर्णय लेने को कहा गया है।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21-ए का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार संवैधानिक अधिकार है। छह से 14 वर्ष की आयु के किसी छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों जिनमें ऐसा करना आवश्यक हो। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को छात्रों के भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण पर शीघ्र फैसला लेने को कहा।
इससे पहले 31 अगस्त को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता को अन्य छात्रों के साथ की गई कथित मारपीट से संबंधित दस्तावेज और दर्ज रिपोर्ट, यदि कोई हो, पेश करने के निर्देश दिए थे। प्रतिवादी को भी मामले से संबंधित दस्तावेज दाखिल करने के लिए कहा गया था।
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तीन सितंबर के आदेश में कोर्ट ने डीएसजी को आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक तत्काल फैक्स के माध्यम से पहुंचाने का निर्देश दिया। आयुक्त को 15 दिन के भीतर आदेश या जवाब प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
इस मामले में हाई कोर्ट ने फिलहाल छात्रों को सीधे उसी स्कूल में वापस भेजने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि अनुशासनात्मक स्थिति और शिक्षा के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन बनाते हुए नजदीकी नवोदय विद्यालय में स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।