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पेंशन मामले में रुपये मांगने की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई, कर्मचारी को सुनवाई का अवसर दिए बिना हटाने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी को हटाने का आधार उसके खिलाफ लगे आरोप और जांच समिति की दोष साबित करने वाली रिपोर्ट हो, तो बिना विधिवत विभागीय जांच और स...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 02:53:19 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 02:53:19 PM (IST)
पेंशन मामले में रुपये मांगने की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई, कर्मचारी को सुनवाई का अवसर दिए बिना हटाने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

HighLights

  1. पेंशन मामले में रुपये मांगने के आरोप पर हटाया गया था कर्मचारी
  2. कोर्ट ने कहा, आरोप के आधार पर कार्रवाई के लिए जांच जरूरी
  3. उचित विभागीय जांच कर कार्रवाई करने की छूट दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पेंशन प्रकरण में रुपये मांगने के आरोप पर सेवा से हटाए गए कोरबा निवासी सीताराम पटेल को हाई कोर्ट से राहत मिली है। हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी को हटाने का आधार उसके खिलाफ लगे आरोप और जांच समिति की दोष साबित करने वाली रिपोर्ट हो, तो बिना विधिवत विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर दिए सेवा समाप्त नहीं की जा सकती।

न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने सात अक्टूबर को सुनवाई के बाद सीताराम को हटाने का 14 जुलाई 2026 का आदेश रद्द कर दिया।

पेंशन प्रकरण में रुपये मांगने की शिकायत

कोरबा के काशीनगर निवासी सीताराम पटेल जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत थे। सेवानिवृत्त महिला पर्यवेक्षक सुनीता लाल के पेंशन संबंधी दस्तावेज तैयार करने के एवज में रुपये मांगने की शिकायत उनके खिलाफ की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं इस आरोप से इनकार किया था।


इसके बावजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से गठित समिति ने जांच की और आरोप सही मानते हुए रिपोर्ट दी। इसी आधार पर उन्हें सेवा से हटा दिया गया।

आरोप साबित मानकर की गई दंडात्मक कार्रवाई

सीताराम के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह सामान्य सेवा समाप्ति का आदेश नहीं, बल्कि आरोप साबित मानकर की गई दंडात्मक कार्रवाई है। इसलिए विधिवत विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर देना जरूरी था। वहीं, शासन की ओर से कहा गया कि जांच समिति ने आरोप सही पाए थे और सेवा समाप्ति का आदेश सामान्य प्रकृति का है।

आरोप के आधार पर कार्रवाई के लिए जांच जरूरी

हाई कोर्ट ने आदेश और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा में पाया कि सेवा समाप्ति का आधार शिकायत और जांच समिति की रिपोर्ट थी। इसलिए इसे सामान्य सेवा समाप्ति नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्वाति प्रियदर्शिनी बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि संविदा कर्मचारी के खिलाफ भी आरोप आधारित दंडात्मक आदेश पारित करने से पहले विधिवत जांच और सुनवाई का अवसर देना जरूरी है।

उचित विभागीय जांच कर कार्रवाई करने की छूट दी

हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति का आदेश रद करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। हालांकि, अधिकारियों को कानून के अनुसार उचित विभागीय जांच कर कार्रवाई करने की छूट दी है। आदेश रद होने से मिलने वाले परिणामी लाभ सीताराम को नियमानुसार दिए जाएंगे।