अजगर के कैंसर की जटिल सर्जरी, अंबिकापुर से बिलासपुर तक चला जीवन बचाने का अनूठा मिशन
अंबिकापुर में रेस्क्यू किए गए 8.5 किलो के इंडियन रॉक पाइथन के मुंह में कैंसर की गांठ मिलने पर स्नेक मैन सत्यम द्विवेदी उसे 250 किमी दूर बिलासपुर ले गए...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 07:54:22 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 07:54:22 PM (IST)
HighLights
- अजगर के मुंह में कैंसर, शिकार निगलना हुआ मुश्किल।
- स्नेक मैन सत्यम 250 किमी दूर बिलासपुर लेकर पहुंचे।
- साढ़े तीन घंटे की सर्जरी में ट्यूमर निकला, ICU में भर्ती।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : सरगुजा से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने वन्यजीव चिकित्सा के इतिहास में नई उम्मीद जगा दी है। अंबिकापुर के विश्वकर्मा मंदिर के पीछे करीब एक सप्ताह पहले रेस्क्यू किए गए इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के मुंह में कैंसर की जानलेवा गांठ थी, भूख से तड़प रहा था, शिकार निगल पाना भी उसके लिए असंभव हो गया था। सरगुजा के स्नेकमैन सत्यम द्विवेदी की संवेदनशील नजर ने उसकी तकलीफ को समझा और 250 किलोमीटर का सफर तय कर उसकी जान बचा ली।
सत्यम ने जब अजगर को पकड़ा तो पहले लगा कि उसने कोई बड़ा शिकार निगला है, इसलिए मुंह सूजा हुआ है। लेकिन सांपों के व्यवहार और आहार की गहरी समझ रखने वाले सत्यम ने गौर से देखा तो मुंह के भीतर असामान्य गांठें दिखीं। अजगर आहार नहीं ले पा रहा था, धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहा था। सत्यम ने तुरंत वन विभाग सरगुजा से संपर्क कर अनुमति ली और उसे बेहतर उपचार के लिए अपनी निगरानी में बिलासपुर ले जाने का निर्णय लिया।
अंबिकापुर से बिलासपुर तक का यह सफर सिर्फ दूरी का नहीं, एक बेजुबान की जिंदगी के लिए जद्दोजहद था। बिलासपुर के कानन पेंडारी में उप संचालक एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डा पीके चंदन ने अजगर की जांच की और तुरंत उसे पेट मेडिक्स के संचालक डा पीयूष दुबे के पास रेफर किया।
साढ़े तीन घंटे चला जीवन-मृत्यु का संघर्ष
डा पीयूष दुबे ने आधुनिक उपकरणों और अपनी सर्जिकल विशेषज्ञता से वह कर दिखाया जो अब तक शायद ही हुआ था। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली बेहद जटिल सर्जरी में अजगर के मुंह के भीतर बनी ट्यूमर की गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के दौरान स्थिति काफी गंभीर थी, सर्जरी के बाद ड्रिप और विशेष देखभाल पर रखा गया।
चिकित्सकों की टीम की मेहनत रंग लाई और अजगर की सांसें लौट आईं। अजगर में कैंसर के सर्जिकल उपचार का सम्भवतः यह पहला केस है। सरीसृपों की चिकित्सा में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।इस पूरे मिशन के हीरो बने सत्यम द्विवेदी लंबे समय से सरगुजा में सांपों और वन्यजीवों के रेस्क्यू में सक्रिय हैं। लोग उन्हें स्नेक मैन ऑफ सरगुजा के नाम से जानते हैं।
साढ़े आठ किलो का है अजगर
लगभग 8.5 किलो वजनी इस अजगर के मुंह में बहुत बड़ी गांठ थी।यह गांठ बढ़कर कैंसर का रूप ले चुकी थी, जिसे अब सर्जरी करके निकाल दिया गया है। आइसीयू सपोर्ट, वेंटिलेटर और कई आधुनिक चिकित्सा मशीनों की मदद से इसे बेहतर से बेहतर देखभाल दी जा रही है।
सत्यम ने इस बार सिर्फ अजगर का रेस्क्यू नहीं किया, बल्कि एक वन्यजीव को मौत के मुंह से खींचकर इंसानियत की मिसाल पेश की। अभी सत्यम अजगर के साथ बिलासपुर में ही हैं, उसकी निरंतर देखभाल कर रहे हैं। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक परिवेश में छोड़ा जाएगा।