
बिलासपुर। नोटबंदी के दौरान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने किसानों के नाम पर बड़े उद्योगपतियों और नेताओं की काली रकम को नए नोट में बदलने की आशंका हैं। इसकी वजह बैंक ने महज पांच दिनों के भीतर 50 करोड़ 29 लाख रुपये के पुराने नोट को नए नोट में बदला है। जबकि बीते दो वर्षों से 2016-17 और 2017-18 में जिले में भीषण अकाल की स्थिति थी।
नोटबंदी के दौरान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाले बिलासपुर,मुंगेली,जांजगीर-चांपा व कोरबा जिले में संचालित 51 शाखाओं में पुराने नोट की जमकर अदला-बदली की गई है। उद्योगपितयों व नेताओं की काली कमाई को नए नोट में बदलने के लिए महज पांच दिनों में खेल किया गया है।
10 से 14 नवंबर 2016 के बीच इतनी बड़ी रकम एक झटके में बदली गई है। गौर करने वाली बात ये है कि बीते दो वर्षों से जिले में अल्पवृष्टि और खंडवृष्टि के चलते अकाल की स्थिति थी। राज्य शासन ने किसानों को फसल क्षतिपूर्ति राशि का वितरण भी किया था। वर्ष 2016-17 में अकाल प्रभावित किसानों को 31 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसी तरह वर्ष 2017-18 में 15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
लगातार अकाल के बाद किसानों के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई इसे लेकर भी सवाल उठाने लगा है। नोटबंदी के दौरान बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले 18 ब्रांचों में सबसे ज्यादा नोट बदले गए हैं। यहां पांच दिनों में 23 करोड़ के पुराने नोट की अदला-बदली का खेल हुआ है।
इसके बाद जांजगीर-चांपा जिले के अंतर्गत आने वाले 17 करोड़ रुपये के नोट की बदली की गई है। जानकारी के अनुसार जिले के बड़े उद्योगपतियों के अलावा व्यापारियों ने रतनपुर से लेकर सरगांव तक जमीन भी खरीद ली है। इन्हीं जमीन के एवज में किसान बन गए हैं और बैंक में अपना अकाउंट भी खुलवा लिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की नजरों में इनकी गिनती किसान के रूप में होती है। बैंक में इनका अकाउंट भी है।
- आरबीआइ की गाइड लाइन और निर्देशों के बाद हमने पुराने नोट की अदला-बदली की है। नाबार्ड ने जांच भी पूरी कर ली है। आरबीआइ का प्रमाण पत्र भी बैंक के पास है। किस खातेधारक ने कितने पुराने नोट बदले इसकी जानकारी हम नहीं दे सकते । यह गोपनीय है। - अभिषेक तिवारी-सीईओ,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक,बिलासपुर