बिलासपुर।Corona News in Bilaspur: कोरोना की तीसरी संभावित आशंकाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को दुरुस्त करने प्रारंभ कर दिया है। संभागीय कोविड असप्ताक को फ़ॉर से खोल दिया गया है। यहां 100 अतिरिक्त बीएड की व्यवस्था कर दी गई है। बच्चो के लाइट अलग से 40 बीएड का आइसीयू वार्ड बनाया गया है। सभी बीएड में आक्सीजन आपूर्ति की सुविधा दे गई है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए प्रशिक्षण और दवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी है।

तीसरी लहर से निपटने के लिए की गई तैयारी पर नजर डालें तो संभागीय कोविड अस्पताल में बेड की संख्या 100 सेे बढ़ाकर 200 कर दी गई है। सभी बेड में आक्सीजन सप्लाई रहेगी इसके लिए दो अतिरिक्त आक्सीजन प्लांट बनाए जा रहे है। वर्तमान में चल रहे एक प्लांट को मिलाकर कुल तीन आक्सीजन प्लांट से मरीजों तक आक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी।

ऐसी हो रही तैयारी

संभागीय कोविड अस्पताल में 200 बीएड के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए 100 अस्थाई वार्ड भी बनाया जा रहा है। एक बिस्तर के इस अस्थाई वार्ड में मरीज के लिए बिस्तर, पंखा, लाईट, बाथरूम सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेगी।

छत्तीसगढ आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स के कोरोना वार्ड मे 140 से अधिक आक्सीजनेटेड बेड की उपलब्धता की गई है।

कोरोना जांच के लिए यहां तीन आरटीपीसीआर मशीन की व्यवस्था रखी गई है।

सिम्स में तैयार हो रहा आक्सीजन प्लांट

सिम्स में 250 केवीए का नया आक्सीजन जनरेटर प्लांट तैयार किया जा रहा है। तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका को मद्देनजर रखते हुए शिशु रोग वार्ड में मेडिकल गैस पाईपलाइन, सेक्शन पाईपलाइन स्थापित किया जा रहा है।

इनकी भी तैनाती

0रेलवे, एसईसीएल, एनटीपीसी के अस्पताल, अपोलो अस्पताल सहित 35 निजी अस्पतालों को भी तैयार रखा गया है।

0 तखतपुर, बिल्हा, मस्तूरी एवं कोटा में बनाए गए कोविड केयर सेंटरों में भी पूर्व में बनाई गई व्यवस्था को यथावत् रखते हुए सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए गए है।

0 ग्रामीण क्षेत्र में मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकताएं घर-घर जाकर वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित कर रही हैं। संक्रमण से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मितानिनों को कोरोना दवा किट एवं दवा पेटी उपलब्ध करा दिया गया है। जिससे वे संक्रमण के प्रारंभिक स्तर पर ही मरीजों को दवाएं दे सकें।

Posted By: anil.kurrey

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