
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर । दुकान आवंटन विवाद को लेकर दायर रिट याचिका की सुनवाई डिवीजन बेंच में हुई। दुर्ग नगर निगम के अफसरों के प्रस्ताव के बाद भी याचिकाकर्ता द्वारा दुकान लेने से इन्कार करने को लेकर हाई कोर्ट की नाराजगी सामने आई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय द्वारा किए गए ऐसे प्रयासों और नगर निगम द्वारा याचिकाकर्ता को दिए गए प्रस्ताव के बावजूद, याचिकाकर्ता आवंटित दुकानों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा कोर्ट को इस याचिका में हस्तक्षेप के लिए कोई अच्छा आधार नहीं मिलता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया है।
दुर्ग निवासी नवीन शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा है कि नगर निगम दुर्ग द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर गया नगर दुर्ग में स्थित दुकान नंबर एक, जो अनारक्षित थी, के आवंटन के लिए निविदा आमंत्रित की और उसने उक्त विज्ञापन में भाग लिया था और निविदा प्रस्तुत की थी। दुकान नंबर एक के लिए फार्म और निविदा फार्म के अनुसार, उनका चयन उनके द्वारा उद्धृत मूल्य के आधार पर किया गया था और उसके द्वारा प्रस्तुत फार्म को विधिवत स्वीकार कर लिया गया था। आवेदन स्वीकार करने के साथ ही नगर निगम ने 18 हजार 350 रुपये की अग्रिम राशि भी जमा करा ली थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के बाद नगर निगम ने दुकान क्रमांक एक का कब्जा नहीं दिया। उक्त रिट याचिका का यह देखते हुए निपटारा कर दिया गया कि चूंकि निगम ने अपने जवाब में कहा है कि मामला सामान्य सभा के समक्ष लंबित है, जिसने दुकान नंबर एक के संबंध में अब तक उत्पन्न हुए विवाद को तय करने के लिए एक समिति का गठन किया है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर प्रकरण का निराकरण का आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रकरण को सामान्य सभा में विचार के लिए रखा गया। सामान्य सभा में लिए गए निर्णय के आधार पर निगम ने 14 जुलाई 2023 को आधिकारिक पत्र लिखकर याचिकाकर्ता को जानकारी दी कि 12 जुलाई 2023 को सामान्य सभा ने दुकान नंबर एक को कार्यालयीन उपयोग के साथ ही सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है। सामान्य सभा में पूर्व में जारी विज्ञापन को रद कर दिया है। पत्र के साथ ही निगम ने याचिकाकर्ता को तीन दिन के भीतर अग्रिम राशि के साथ ही बैंक चेक को वापस ले जाने का निर्देश दिया।
सामान्य सभा के फैसले को दी चुनौती
नगर निगम के सामान्य सभा में लिए गए निर्णय और इसी परिप्रेक्ष्य में निगम द्वारा जारी पत्र को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता नवीन शुक्ला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने निगम द्वारा जारी नोटिस को रद करने और दुकान नंबर एक का आवंटन करने की मांग की। याचिकाकर्ता का कहना है कि दुकान का आवंटन जानबूझकर रद कर दिया गया है, ताकि उसे संबंधित दुकान से वंचित किया जा सके। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रिटर्न दायर करने दो सप्ताह की मोहलत दी। इसके बाद प्रकरण को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बीच संबंधित दुकान का उपयोग न तो प्रतिवादी द्वारा किसी भी उद्देश्य के लिए किया जाएगा और न ही उसे किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित किया जाएगा।
आदेश के बाद भी परिसर का बदल दिया नक्शा
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि नगर निगम दुर्ग के अफसरों ने कोर्ट के आदेश का सीधे तौर पर उल्लंघन किया है। दुकान किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित नहीं की गई थी लेकिन परिसर की प्रकृति जो वर्तमान याचिका का विषय है उसे बदल दिया गया है, दूसरे उपयोग के लिए परिवर्तित कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने शपथ पत्र के साथ ही परिसर का फोटोग्राफ्स भी कोर्ट में पेश किया है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने निगम आयुक्त को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया व अगली सुनवाई के लिए 12 दिसंबर 2023 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
दुकान लेने से याचिकाकर्ता का इन्कार
जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रवींद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। नगर निगम दुर्ग की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा कि दो सप्ताह की अवधि के भीतर याचिकाकर्ता को एक और उपयुक्त स्थान प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। अधिवक्ता दुबे ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को दुकान आवंटित करने निगम ने प्रस्ताव दिया है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि जो दुकान उसे आवंटित करने का प्रस्ताव है वह ऐसी जगह पर है जहां जनता की पहुंच नहीं है। इसके बाद अधिवक्ता दुबे ने कहा कि वह अपेक्षित शर्तों की मंजूरी के बाद याचिकाकर्ता को एक उचित दुकान आवंटित कराने की पूरी कोशिश करेंगे। याचिकाकर्ता ने कहा कि जिन दुकानों को उसे आवंटित करने का प्रस्ताव है, उनमें गंजमंडी काम्प्लेक्स और जलगृह काम्प्लेक्स की दुकानें शामिल हैं। न तो वाणिज्यिक परिसर में स्थित है और न ही घनी आबादी वाले क्षेत्र में। जनता की पहुंच नहीं है और इस तरह दुकानें पूरी तरह से बेकार हैं और इसलिए उन्होंने कोई सहमति नहीं दी।