
बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि): न्यायधानी बिलासपुर के आम शहरी और मध्यमवर्गीय यात्रियों की लाइफलाइन मानी जाने वाली 'सिटी बस सेवा' एक बार फिर गंभीर वित्तीय और संचालन संकट के भंवर में फंस गई है। पेट्रोल-डीजल की लगातार आसमान छूती कीमतों और नगर निगम के ईंधन पंप में आए डीजल संकट के कारण शहर के पांच प्रमुख रूटों पर चल रही इन बसों के पहिए कभी भी पूरी तरह थम सकते हैं। बसों का संचालन संभाल रही 'बिलासपुर अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सोसाइटी' के सामने आर्थिक तंगी इतनी गहरा गई है कि रोजाना का खर्च निकालना भी नामुमकिन हो गया है। फंड की भारी किल्लत के चलते सोसाइटी प्रबंधन कभी भी इस सस्ती यात्री सेवा को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का बड़ा फैसला ले सकता है।
वर्तमान में सिटी बसें शहर के कोटा, तखतपुर, लमेर, बिल्हा और सीपत रूट पर दौड़ रही हैं। रेलवे स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक का किराया महज 40 से 50 रुपये और नेहरू चौक तक करीब 15 रुपये तय किया गया है। जनता को सस्ती परिवहन सेवा देने के चक्कर में किराया तो नहीं बढ़ाया गया, लेकिन इसी कम किराए के कारण संचालन सोसाइटी को हर दिन लगभग 17 हजार रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चालकों-परिचालकों के वेतन से लेकर रोज का डीजल खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
इस बीच, मंगलवार को नगर निगम का अपना पेट्रोल पंप डीजल खत्म होने से पूरी तरह ड्राई हो गया, जिससे संकट और गहरा गया। सुबह कोटा रूट की पहली बस समय पर डिपो से बाहर नहीं आ सकी। बाद में कुछ बसों को जैसे-तैसे निजी पंपों से महंगा डीजल डलवाकर रवाना किया गया, जबकि कम यात्री भार वाले रूटों की बसों को सीधे डिपो में खड़ा कर दिया गया।
सोसाइटी के नोडल अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि डीजल की बेलगाम कीमतों के कारण सेवा प्रभावित हो रही है। अब किराया बढ़ाने अथवा अन्य आपातकालीन विकल्पों पर अंतिम निर्णय लेने के लिए सोसाइटी की उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई
ऐसे समझे पूरे मामले को
यह भी पढ़ें- सड़क हादसे में बहू की मौत पर कोर्ट ने सास को दिलाया 18 लाख मुआवजा