
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। तारबाहर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आनलाइन ठगी करने वाले म्यूल अकाउंट सिंडिकेट के खिलाफ एक और बड़ी सफलता अर्जित की है। पुलिस ने साइबर अपराध के स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे इस नेटवर्क के तीन शातिर आरोपितों को अंबिकापुर से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपितों द्वारा साइबर ठगों को उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों में 60 से अधिक साइबर फ्राड की शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से ठगी के डिजिटल साक्ष्यों से युक्त तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। तारबाहर पुलिस के अनुसार 13 मई को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले मुख्य सिंडिकेट मेंबर दीपेश कुमार गुप्ता को एसबीआइ व्यापार विहार के बाहर से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था।
साइबर सेल ने जब आरोपित दीपेश के मोबाइल फोन का गहन तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फारेन्सिक परीक्षण किया, तो उसमें अंबिकापुर निवासी तीन अन्य आरोपितों के संलिप्त होने के पुख्ता इनपुट मिले।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपित दीपेश गुप्ता और अंबिकापुर से गिरफ्तार तीनों आरोपित आपस में वाट्सएप तथा अन्य इन्क्रिप्टेड कॉलिंग माध्यमों से जुड़े हुए थे। ये लोग ग्रामीण और सीधे-सादे व्यक्तियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उन खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स की गोपनीय जानकारी आपस में साझा कर म्यूल अकाउंट का पूरा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के मिलान में यह पाया गया कि आरोपितों द्वारा तैयार किए गए इन संदिग्ध बैंक खातों का उपयोग देश के विभिन्न कोनों में बैठे साइबर अपराधी आम जनता से ठगी गई रकम को प्राप्त करने, उसे लेयरिंग (इधर-उधर ट्रांसफर) करने और अंत में नकद निकालने के लिए कर रहे थे।
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आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने धारा 318(4), 317(4), 3(5) और धारा 112 के तहत अपराध दर्ज किया। तीनों आरोपितों को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अफसरों के अनुसार आरोपितों के जब्त मोबाइलों की विस्तृत जांच जारी है, जिससे कई अन्य बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।