नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर: पर्यावरण और पानी के लिए हानिकारक प्लास्टर आफ पेरिस (पीओपी) से निर्मित भगवान गणेश की 24 छोटी प्रतिमाओं को गुरुवार को नगर निगम और पर्यावरण विभाग ने जब्त किया। निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर नगर निगम और पर्यावरण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से शहर में गणेश प्रतिमा विक्रय के लिए लगाई गई दुकानों का निरीक्षण किया गया।
इसमें इमलीपारा, पुराना बस स्टैंड, बृहस्पति बाजार, मुंगेली नाका, सुभाष चौक, देवकीनंदन चौक, दयालबंद क्षेत्र में मूर्ति दुकानों का दौरान किया गया। इस दौरान मुंगेली नाका और बृहस्पति बाजार की दो दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टर आफ पेरिस से निर्मित 24 गणेश की छोटी प्रतिमाएं पाई गई, जिसे जब्त कर लिया गया है। इन्हें अंतिम चेतावनी दी गई कि यदि अब पीओपी की प्रतिमा बेचते पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिमा निर्माण में प्रतिबंधित प्लास्टिक, पीओपी अथवा ऐसे किसी भी पदार्थ का उपयोग पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, उसका उपयोग करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसकी वजह से विशेष रूप से विसर्जन के दौरान प्लास्टिक, पीओपी, रासायनिक रंग एवं अन्य गैर-जैव अपघटनीय सामग्री जल स्रोतों में पहुंचकर जल की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती है।
जलीय जीवों एवं वनस्पतियों को नुकसान पहुंचा सकती है तथा मिट्टी और जल प्रदूषण का कारण बनती है। इसलिए प्रतिमा निर्माण में पर्यावरण अनुकूल सामग्री एवं प्राकृतिक रंगों के उपयोग को प्राथमिकता दी गई है और पर्यावरणीय अनुकूल मिट्टी से ही प्रतिमा बनाने के निर्देश हैं। इसके बाद भी कुछ मूर्तिकार पीओपी की प्रतिमा बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा निर्माण का संदेश
नगर निगम ने बीते 18 अगस्त को शहर के सभी मूर्तिकारों की बैठक लेकर प्रतिमा निर्माण में प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग नहीं करने को लेकर दिशा निर्देश दिए थे। इस दौरान निगम प्रशासन ने सभी मूर्तिकारों से अपील भी की थी, आगामी उत्सवों में आस्था भी, संस्कृति भी और पर्यावरण संरक्षण भी के संकल्प के साथ प्रतिमाओं का निर्माण करें। मूर्तिकारों की कला समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है और यदि यही कला पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा।
क्यों है पीओपी और केमिकल युक्त मूर्तियां खतरनाक?
प्लास्टर आफ पेरिस पानी में आसानी से घुलता नहीं है। विसर्जन के बाद यह जल स्रोतों की तली में बैठकर पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकता है और पानी को दूषित करता है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग (जैसे लेड, मर्करी, क्रोमियम) पानी में मिलकर घुलनशील जहरीले तत्व पैदा करते हैं, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मौत तक हो जाती है।
नान-बायोडिग्रेडेबल होने के कारण पीओपी के अवशेष लंबे समय तक मिट्टी में बने रहते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है। केमिकल रंगों और सिंथेटिक सामग्रियों के संपर्क में आने से त्वचा संबंधी बीमारियां, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने का गंभीर खतरा रहता है।
प्रतिमा निर्माण में मिट्टी का ही उपयोग सही
नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे का कहना है कि आने वाले दिनों में विश्वकर्मा, दुर्गा पूजा के साथ अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा बनाई जाएगी। इस दौरान भी नियमों का ध्यान मूर्तिकार रखे और मिट्टी से प्रतिमा बनाएं। यदि इस दौरान पीओपी की प्रतिमा बनाते या बेचते हुए पाया जाते हैं तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।