
बिलासपुर(निप्र)। झीरम घाटी हमले मामले की सुनवाई कर रहे एनआईए के विशेष न्यायाधीश और जिला एवं सत्र न्यायाधीश महादेव कातुलकर को नक्सलियों ने पत्र लिखकर धमकी दी है। इसमें झीरम घाटी मामले को सुनवाई के लिए जगदलपुर नहीं भेजने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की बात लिखी गई है। उन्हें दूसरी बार नक्सलियों से धमकी भरा पत्र मिला है। मामले को एनआईए के प्रकरण की कार्यवाही में दर्ज किया गया है।
झीरम घाटी मामले में 25 अगस्त को सुनवाई होनी थी, लेकिन 24 अगस्त की सुबह ही एनआईए के विशेष न्यायाधीश श्री कातुलकर के बंगले के दरवाजे के सामने एक पत्र मिला। इसमें श्री कातुलकर व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। पत्र में लिखा है कि पुलिस उनकी रक्षा नहीं कर सकती। साथ ही कहा गया है कि बस्तर में पदस्थापना के दौरान चेनसी, उदल जैसे क्रांतिकारी कार्यकर्ताओं को जेल भेजने का उनसे बदला लिया जाएगा।
इसके अलावा झीरम घाटी मामले को सुनवाई के लिए जगदलपुर भेजे या यहां से जाने के लिए कहा गया है। पत्र में श्री कातुलकर व उनके पूरे परिवार को मारने की धमकी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसा उदाहरण पेश किया जाएगा कि कोई भी जज नक्सलियों के खिलाफ नहीं जाएगा। पत्र में किसी भी नक्सली संगठन और उनके पदाधिकारी का उल्लेख नहीं किया गया है।
इस पत्र को एनआईए के अधिवक्ताओं के समक्ष प्रकरण के आर्डर शीट में दर्ज किया गया। एनआईए के अधिवक्ता धन सिंह सोलंकी समेत अन्य ने सुनवाई करने वाले अधिकारियों को सुरक्षा दिलाने और सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग की है। इससे पहले 12 जून 2015 को भी श्री कातुलकर के बंगले में बम फोड़कर धमकी भरा पत्र फेंका गया था। न्यायालय ने उस मामले में पुलिस से अब तक की कार्रवाई का प्रतिवेदन मांगा है। इसके साथ मामले को सुनवाई के लिए 26 सितंबर को रखने का आदेश दिया गया है।
क्या है मामला
झीरम घाटी में 25 जून 2013 को नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हमला कर दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की हत्या कर दी थी। इस मामले में एनआईए ने महिला नक्सली प्रमिला मोडियम, बज्जामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा, आयता मडकामी, मुक्का मंडावी, मडकामी देवा, कवासी कोसा, कवासी कोसा उर्फ कोसराम, चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना, महादेव नाग समेत अन्य को गिरफ्तार किया है।
एनआईए के विशेष न्यायाधीश तथा बिलासपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश महादेव कातुलकर की अदालत में प्रकरण पेश किया गया है। मामले की सुनवाई को लेकर क्षेत्राधिकार पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राज्य शासन कीअधिसूचना के अनुसार सुनवाई जगदलपुर की अदालत में होनी हैं।
वहीं, एनआईए का कहना है कि केंद्र सरकार ने बिलासपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को एनआईए का विशेष न्यायाधीश बनाया है। एनआईए ने मामले की सुनवाई यहीं कराने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण फिलहाल जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कातुलकर मामले की सुनवाई वीडियोकांफ्रेंसिग से कर रहे हैं।