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डीएनए रिपोर्ट से जैविक पिता की पुष्टि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित की जमानत खारिज की

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी छोटू यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट और चिकित्सकीय साक्ष्यों को आधार ब...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 08:28:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 08:28:44 PM (IST)
डीएनए रिपोर्ट से जैविक पिता की पुष्टि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित की जमानत खारिज की
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. पाक्सो एक्ट और दुष्कर्म के तहत कोरबा के अजाक थाने में दर्ज है मामला।
  2. डीएनए रिपोर्ट आने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी की याचिका ठुकराई।
  3. प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत होने के कारण राहत देने से इनकार।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरबा के अजाक थाने में दर्ज एक मामले में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित युवक छोटू यादव उर्फ सूरज यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले में पीड़िता के बयान के साथ गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सकीय साक्ष्य और डीएनए जांच रिपोर्ट अभियोजन के आरोपों को प्रथम दृष्टया मजबूत करते हैं। डीएनए रिपोर्ट में आरोपित को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने यह आदेश दिया।

आरोपित बिहार के सहरसा जिले के बड़ियारी गांव का रहने वाला है और वर्तमान में कोरबा जिले के आवराकछार चुहिया में रहता है। उसके खिलाफ कोरबा के अजाक थाना में अपराध दर्ज है। उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 64(1), पाक्सो अधिनियम की धारा 4, 6 और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।


अभियोजन के अनुसार 4 मई 2025 को पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि परिवार के साथ जंगल जाने के दौरान उनकी दूसरी बेटी घर पर अकेली थी। लौटने पर वह घर से गायब मिली। 10 मई को पीड़िता खुद घर लौट आई और परिजनों ने उसे पुलिस के सामने पेश किया। जांच में उसके आरोपी के साथ शारीरिक संबंध होने और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को चालान पेश किया और ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय कर दिए।

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शादी का भरोसा देकर जबरन संबंध बनाए

ट्रायल कोर्ट में पीड़िता ने आरोपी पर प्रेम जताने और शादी का भरोसा देने के बाद जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। आरोपित उसे जंगल और अपने घर के आंगन में ले गया और करीब छह-सात बार संबंध बनाए। बाद में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी हुई और उसने आरोपित को भी बताया। पीड़िता के अनुसार बरामदगी के समय वह करीब सात-आठ महीने की गर्भवती थी। उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन करीब एक सप्ताह बाद बच्चे की मौत हो गई।

डीएनए रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य

हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान की पुष्टि गर्भावस्था संबंधी चिकित्सकीय साक्ष्य से होती है। इससे भी महत्वपूर्ण डीएनए जांच रिपोर्ट है, जिसमें आरोपी को मृत बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। कोर्ट ने माना कि यह रिपोर्ट आरोपी और पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध होने के अभियोजन के मामले को महत्वपूर्ण आधार देती है।

आरोपित की ओर से कहा गया कि पीड़िता खुद उसके साथ पटना और चांपा गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। साथ ही पीड़िता की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर इन दलीलों को अलग-अलग देखकर नहीं माना जा सकता, खासकर जब अभियोजन का मामला है कि घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से कम उम्र की थी।

कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबतू

हाई कोर्ट ने पीड़िता और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के ट्रायल कोर्ट में बयान हो जाने को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट को देखते हुए आरोपित के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद है। अपराध की गंभीरता, घटना के समय पीड़िता की उम्र और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।