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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

साइबर अपराधी को सजा दिलाने साक्ष्य संकलन महत्वपूर्ण: आइजी बिलासपुर

बिलासपुर रेंज के थानों में सायबर अपराध पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से सोमवार 11 नवंबर को एक दिवसीय सायबर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन चेतना भवन, रक...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 12 Nov 2024 02:48:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 Nov 2024 02:48:20 PM (IST)
साइबर अपराधी को सजा दिलाने साक्ष्य संकलन महत्वपूर्ण: आइजी बिलासपुर
कार्यशाला में उपस्थित अधिकारी व पुलिस के जवान

HighLights

  1. सोमवार 11 नवंबर को एक दिवसीय सायबर प्रशिक्षण कार्यशाला।
  2. कार्यशाला में मिली जानकारी से पुलिस के जवान बेहतर काम कर सकेंगे।
  3. साक्ष्य संकलन, सीडीआर विश्लेषण, और ओपन सोर्स इंटेलीजेंस का प्रशिक्षण।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। साइबर अपराध के मामले में अपराधी को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए साक्ष्य संकलन महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके लिए विवेचकों को साक्ष्य संकलन के लिए तकनीकी जानकारी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें मिली जानकारी से पुलिस के जवान बेहतर काम कर सकेंगे। ये बातें आइजी डा. संजीव शुक्ला ने चेतना भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

सायबर अपराध पीड़ितों की सहायता का उद्देश्य

यह कार्यक्रम पुलिस महानिरीक्षक डा. संजीव शुक्ला के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह उपस्थित रहे। डा. शुक्ला और एसपी सिंह ने सायबर अपराधों की बढ़ती चुनौती और थाना स्तर पर तकनीकी ज्ञान रखने वाले कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया।


इस कार्यशाला में प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के 122 चुने हुए कर्मचारियों को सायबर अपराध से जुड़ी तकनीकी जानकारियां जैसे साक्ष्य संकलन, सीडीआर विश्लेषण, और ओपन सोर्स इंटेलीजेंस का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसपी रजनेश सिंह ने कहा कि प्रशिक्षित कर्मचारी थानों में सायबर क्राइम पीड़ितों की सहायता करने में अधिक सक्षम होंगे।

जोनल पुलिस अधीक्षक दीपमाला कश्यप, एएसपी अनुज कुमार और सायबर विशेषज्ञों ने भी प्रशिक्षण में योगदान दिया। इस कार्यशाला में बिलासपुर के साथ ही रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती के कुल 122 शामिल हुए। कार्यशाला के समापन पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 10 प्रशिक्षणार्थियों को आइजी ने नगद पुरस्कार से सम्मानित किया।

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शिविर में डिजिटल साक्षरता पर दिया जोर

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नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के शिक्षण विभाग की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा गोद ग्राम नगोई में 5 से 11 नवंबर तक सात दिवसीय विशेष शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का उद्देश्य "मेरा युवा भारत के लिए युवा, डिजिटल साक्षरता के लिए युवा" था।

इस दौरान कुल 79 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। शिविर में प्रत्तेक दिन योगासन, खेलकुद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शिविर की शुरुआत विश्वविद्यालय के रा.से.यो. समन्वयक डा. मनोज सिन्हा, डा. कलाधर और नगोई के सरपंच ने किया।

शिविर में स्वयंसेवकों ने गाव में प्रभात फेरी निकाली, स्वच्छता अभियान चलाया और डिजिटल साक्षरता, पर्यावरण संरक्षण व नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाया। पोस्टर और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

शिविर में योग, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बौद्धिक सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, और आहार-पोषण पर चर्चाएं हुईं। समापन समारोह में कुलपति आचार्य अरुण दीवाकर नाथ बाजपेयी ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भविष्य में इस तरह के शिविरों के माध्यम से समाजसेवा को बढ़ावा देने का संदेश दिया।