
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा राशि हड़पने वाले संगठित गिरोह का बिलासपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के शातिर आरोपित सूचना का अधिकार (आरटीआई) को कूटलिखित दस्तावेज तैयार करने का हथियार बनाते थे। पुलिस से इसके जरिए मर्ग की पूरी डिटेल व सत्यापित प्रतियां निकलवाकर उसमें छेड़छाड़ की जाती थी। वहीं अत्यधिक शराब सेवन, जहरीले पदार्थ या दुर्घटना से हुई मौतों को सर्पदंश में बदलकर लाखों का फर्जीवाड़ा किया जाता था। पुलिस जांच के अनुसार पूरे मामले में मास्टरमाइंड वकील और उनके साथी सबसे पहले मर्ग कायम होने वाले मामलों की जानकारी जुटाते थे।
इसके बाद शासकीय योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर मृतक के स्वजन से संपर्क किया जाता था। स्वजन के माध्यम से संबंधित थानों में आरटीआइ आवेदन लगवाकर मर्ग व अन्य रिपोर्ट की सत्यापित छायाप्रति हासिल कर ली जाती थी। असली दस्तावेज मिलते ही उसमें छेड़छाड़ कर मौत का कारण सर्पदंश दर्ज कर दिया जाता था।
जांच में पता चला है कि थाना सिटी कोतवाली अंतर्गत ग्राम कुंआ तखतपुर निवासी रिक्शा चालक जमुना प्रसाद सोनवानी की मौत शराब के अत्यधिक सेवन से हुई थी। वकील श्रवण वस्त्रकार ने मृतक की पत्नी सुनीता बाई से संपर्क कर आरटीआइ से मर्ग रिपोर्ट निकलवाई और उसमें बिच्छू काटने से मौत दर्शाकर चार लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत करा लिया। राशि खाते में आते ही वकील ने एक लाख 75 हजार रुपये ऐंठ लिए।
इस मामले में तहसीलदार के वाहन चालक गोविंद विश्वकर्मा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसी तरह तोरवा थाना अंतर्गत महमंद निवासी निसार खान की मौत हैदराबाद में हुई दुर्घटना के बाद घर में गिरने से हुई थी। मर्ग रिपोर्ट में फेरबदल कर सर्पदंश दर्शाया गया। मुआवजा राशि मिलने पर वकील श्रवण ने अपने जूनियर अश्वनी साहू के जरिए मृतक की पत्नी सबीना बानो से एक लाख 75 हजार रुपये मंगा लिए।
इस मामले में दुर्घटना को सर्पदंश लिखने वाली डाक्टर प्रियंका सोनी और सबीना बानो को भी आरोपित बनाया गया है। तीसरा मामला बिल्हा थाने का है, जहां पोड़ी निवासी शिवकुमार घृतलहरे की मौत जहर सेवन से हुई थी। यहां भी डाक्टर प्रियंका सोनी की मिलीभगत से पोस्टमार्टम में सर्पदंश दर्शाया गया। मुआवजा राशि आरोपित स्वजन के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई, जिसमें वकील कांता प्रसाद साहू निवासी पेंडारी और बिल्हा तहसील के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
पुलिस की पड़ताल में राजूकुमार विश्वकर्मा आवेदक अमरिका बाई, बहोरन लाल जायसवाल आवेदक प्रेमी बाई, गुंजमती साहू आवेदक मनसुख लाल साहू, शशि पाठक आवेदक सुभाषचंद्र पाठक और शंकर साहू आवेदक शिवकुमारी साहू के मामलों में भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा राशि हडपने की बात उजागर हुई है।
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बिलासपुर पुलिस के अनुसार यह एक संगठित गिरोह है जिसमें सरकंडा थाने के मामले में वकील हीरा प्रसाद खांडेकर की भूमिका संदिग्ध हैं। कोनी थाने के मामले में महेन्द्र मनहर हीरा प्रसाद खांडेकर की भूमिका संदिग्ध पायी गई है। सिटी कोतवाली और तोरवा मामले में अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार का नाम सामने आया है। बिल्हा और तोरवा मामले में डाक्टर प्रियंका सोनी की भूमिका संदिग्ध है।
तहसील कार्यालय के कर्मचारी एसडीएम कार्यालय में पदस्थ बाबू गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और तहसील कार्यालय के बाबू हरिराम राठौर, तहसीलदार के चालक गोविंद विश्वकर्मा संदिग्ध हैं। फिलहाल पुलिस सभी मामलों में शामिल आरोपितों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर रही है।