युवती को यूपी ले जाने, यौन शोषण के बाद बेचने के आरोप में पिता-पुत्र को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने किया जमानत देने से साफ इंकार
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंबिकापुर के मणिपुर थाने में दर्ज मानव तस्करी और यौन शोषण के मामले में आरोपी पिता-पुत्र राकेश और सुमित राठौर की जमानत याचिका खा...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 10:10:26 PM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 10:10:26 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- मानव तस्करी और यौन शोषण के आरोपी पिता-पुत्र को हाई कोर्ट से बड़ा झटका।
- मणिपुर थाना पुलिस ने जालौन से आरोपियों को दबोचकर युवती को किया था बरामद।
- वैध विवाह का प्रमाण न होने और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर याचिका ठुकराई गई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवती को दूसरे राज्य ले जाने और यौन शोषण के आरोपों में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जालौन निवासी पिता-पुत्र राकेश राठौर और सुमित राठौर उर्फ लुच्चे की जमानत अपील खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया, जिसमें अपराध की गंभीरता और पीड़िता के बयान को ध्यान में रखा गया। अभियोजन के अनुसार, आरोपितों ने लड़कियों को काम दिलाने का झांसा देकर उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर उनकी सौदेबाजी की। इसी शिकायत पर मणिपुर थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने 26 जून 2025 को जालौन से राकेश और सुमित को गिरफ्तार किया, जबकि सुमित के घर से 21 वर्षीय युवती को बरामद किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप पत्र पेश किया गया।
बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि मुख्य आरोप अन्य सहआरोपियों पर हैं और पीड़िता ने सुमित से शादी की बात कही है। हालांकि, राज्य के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता आरोपियों के घर से बरामद हुई थी और मेडिकल रिपोर्ट भी उसके बयानों से मेल खाती है।
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हाई कोर्ट ने मामले को माना बेहद गंभी र
हाई कोर्ट ने केस डायरी और पीड़िता के बयान का अवलोकन करते हुए पाया कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति से है और आरोपियों ने वैध विवाह का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। ट्रायल कोर्ट में पीड़िता ने अभियोजन के मामले का समर्थन किया। इस आधार पर हाई कोर्ट ने जमानत खारिज करने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।