
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नगर निगम क्षेत्र के सिरगिट्टी में शुक्रवार दोपहर स्ट्रीट लाइट लगाने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। लोहे का बिजली पोल खड़ा करते समय वह ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन से संपर्क में आ गया।
पोल में करंट फैलते ही उसे संभाल रहे पांच मजदूर उसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों में चार पुरुष और एक महिला शामिल हैं। सभी को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है।
सिरगिट्टी के आदर्श नगर वार्ड क्रमांक 11 स्थित पानी टंकी के पास नगर निगम की ओर से स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा था। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे मजदूर लोहे का पोल स्थापित कर रहे थे। इसी दौरान पोल अचानक ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया।
लाइन से संपर्क होते ही पूरे लोहे के पोल में तेज करंट दौड़ गया। पोल को संभाल रहे पांचों मजदूर इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।
हादसे में मध्य प्रदेश के मंडला जिले के रहने वाले दीपक यादव (30), मुकेश कुमार (38), सेवाराम (24), प्रहलाद चौरसिया (45) और जयंती धुर्वे घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल-112 को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में सभी का उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ मजदूर गंभीर रूप से झुलसे हैं, इसलिए उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। घटना की जानकारी उनके स्वजन को भी दे दी गई है।
घटना के बाद कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरों के पास इंसुलेटेड ग्लव्स, सुरक्षा जूते, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा हाईटेंशन लाइन के नीचे काम शुरू करने से पहले बिजली आपूर्ति बंद कराने या अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की भी जानकारी सामने नहीं आई।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो इस हादसे से बचा जा सकता था। बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के हाईटेंशन लाइन के नीचे काम कराना मजदूरों की जान जोखिम में डालने जैसा है।
हादसे में घायल सभी मजदूर मध्य प्रदेश के मंडला जिले के निवासी हैं। वे नगर निगम के स्ट्रीट लाइट लगाने के कार्य में ठेकेदार के माध्यम से लगे हुए थे। घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण और विद्युत कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। ऐसे कार्यों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
घटना के बाद सबसे अहम सवाल सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर उठ रहा है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि क्या ठेकेदार ने बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों को काम पर लगाया था या नगर निगम और संबंधित विभाग की ओर से निगरानी में कमी रही।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि हाईटेंशन लाइन के नीचे कार्य शुरू करने से पहले बिजली विभाग से अनुमति ली गई थी या लाइन का शटडाउन कराया गया था। यदि जांच में किसी अधिकारी, ठेकेदार या संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
यह घटना निर्माण और विद्युत कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्य शुरू करने से पहले सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना ऐसे हादसों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।