बिलासपुर में फ्लैट दिलाने के नाम पर 23 लाख के लोन में धोखाधड़ी, बिल्डर व बैंक अधिकारियों पर एफआइआर
बिलासपुर के तारबाहर थाना क्षेत्र में फ्लैट दिलाने के नाम पर २३ लाख रुपये के होम लोन में बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 10:52:01 AM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 10:52:01 AM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र इंटरनेट से लिया गयाHighLights
- बिल्डर और बैंक अफसरों की मिलीभगत से 23 लाख का फर्जी लोन; तारबाहर थाने में दर्ज हुई एफआईआर
- बैंक ऑफ बड़ौदा में गिरवी थी विनायका हाइट्स की जमीन; सेंट बैंक के अफसरों ने फिर भी बांट दिया लोन
- बिना सहमति बिल्डर के खाते में ट्रांसफर किए 23 लाख रुपये; अब पीड़ित को मिल रही मकान खाली करने की धमकी
बिल्डर और बैंक अधिकारियों पर मिलीभगत कर रकम ट्रांसफर करने का आरोप
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: तारबाहर क्षेत्र में फ्लैट दिलाने के नाम पर 23 लाख रुपये के होम लोन में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने बिल्डर और सेंट बैंक के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भादवि की धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस बैंक के अधिकारियों और बिल्डर की भूमिका की जांच कर रही है।
तारबाहर के विनायका हाइट्स निवासी चन्द्रिका प्रसाद कुशवाहा (50) ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने विनायका हाइट्स परियोजना में तीसरी मंजिल का फ्लैट नंबर 402 करीब 30 लाख रुपये में खरीदने का एग्रीमेंट किया था। बिल्डर राजेश सेठ ने सेंट बैंक से आसान तरीके से लोन दिलाने का भरोसा दिलाते हुए बैंक के तत्कालीन प्रबंधक शशि भूषण कर्ण सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कराई। दस्तावेज जमा कराने के बाद उनके नाम पर 23 लाख रुपये का होम लोन स्वीकृत हो गया।
पीड़ित ने बताया कि 18 फरवरी 2017 को फ्लैट की रजिस्ट्री उनके और उनकी पत्नी के नाम कराई गई, लेकिन बैंक अधिकारियों ने उनकी सहमति के बिना पूरी लोन राशि बिल्डर राजेश सेठ और रजनी सेठ के खातों में ट्रांसफर कर दी। इसके बावजूद फ्लैट का निर्माण तय समय में पूरा नहीं किया गया। बैंक आफ बड़ौदा की ओर से 2019 में संबंधित संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई का नोटिस चस्पा किए जाने के बाद उन्हें पता चला कि जमीन और भवन पहले से ही बैंक आफ बड़ौदा के पास गिरवी थे।
इसके बावजूद बिल्डर और बैंक अधिकारियों ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर लोन स्वीकृत कराया और चरणबद्ध तरीके से पूरी राशि जारी कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार शेष राशि जारी नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर भुगतान कर दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 में कुछ बैंक अधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्हें धमकाते हुए मकान खाली करने की बात कही।
मामले की शिकायत पर तारबाहर पुलिस ने बिल्डर राजेश सेठ, रजनी सेठ तथा बैंक के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साझा आपराधिक कृत्य का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और बैंक रिकार्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।