
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रेलवे में माललदान के दबाव के बीच जर्जर वैगनों का इस्तेमाल किए जाने से सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जोनल स्टेशन से प्रतिदिन ऐसी मालगाड़ियां गुजरती दिखाई देती हैं, जिनके वैगनों के ढक्कन टूटे हुए हैं और कई जगहों पर छेद तक नजर आते हैं। कई वैगनों में ढक्कन के लाक खराब हैं और उन्हें तार के सहारे बांधकर चलाया जा रहा है। ऐसे में परिचालन के दौरान ढक्कन खुलने पर स्टेशन के हाइड्रेन पाइप, सिग्नल व अन्य उपकरण को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही वैगन के क्षतिग्रस्त हिस्सों से परिचालन सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है। इस पर रोक लगाने में रेल प्रशासन नाकाम है।
रेल प्रशासन पहली प्राथमिकता मालगाड़ी परिचालन को देता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। इसके लिए कोचिंग ट्रेनों को बेवजह रोका जाता है। दरअसल लदान का लक्ष्य पूरा करने के लिए ऐसा किया जाता है। माललदान की इस आपाधापी में लगातार संरक्षा को दरकिनार किया जा रहा है।
मालगाड़ी की नियमित परीक्षण हो रहा है और न वैगनों की स्थिति देखी जा रही है। लोडिंग के बाद अनलोडिंग हो रहा है। जबकि जर्जर वैगन से चलने वाली मालगाड़ी कभी भी खतरा बन सकती है। इसके बावजूद रेलवे ध्यान नहीं दे रही है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन में खड़ी एक मालगाड़ी की स्थिति तो इतनी जर्जर थी कि उनके वैगन को देखकर कोई भी यह अनुमान लगा सकता है कि सारे वैगन कंडम अनुपयोगी हो चुके हैं।
एक भी वैगन ऐसे नहीं थे, जिनके ढक्कन हुक से लाक हो। सभी के हुक टूटे हुए थे, जिन्हें तारों से बांधकर खुलने से रोका गया था। तार कब टूब जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। रेलवे नियम-शर्तों का हवाला जरुर देती है। लेकिन, उनका उल्लंघन भी खुलेआम करती है। इसके अलावा इनके पहियों की हालत भी देखकर लग रहा था सालों से इनका मेंटेनेंस नहीं हुआ है। मालगाड़ी की इस स्थिति में परिचालन खतरा है। इसके बावजूद रेलवे इन पर अंकुश लगाने में नाकाम है। हैरानी की बात यह है कि परिचालन के दौरान सीएडंडब्ल्यू की टीम निगरानी भी करती है। इसके बावजूद, वह इस तरह के मालगाड़ियों के चलने की सूचना नहीं देते। इसके कारण कभी दुर्घटना हो सकती है।
हाइड्रेन व एफओबी हो चुके हैं क्षतिग्रस्त
वैगन के ढक्कन अचानक खुलने के कारण बिलासपुर रेलवे स्टेशन में पहले घटना हो चुकी है। ढक्कन से टकराकर हाइड्रेन पाइप टूटने की घटना कई बार हुई। एक बार तो एफओबी भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। 100 साल पुराने एफओबी के क्षतिग्रस्त होने के बाद पूरे ब्रिज को ढहाकर हटा दिया गया।
35 साल होती है वैगन की आयु
भारतीय रेलवे में मालगाड़ी के वैगन की निर्धारित (Codal) आयु वैगन के प्रकार पर निर्भर करती है। हाल के संशोधित मानकों के अनुसार वैगनों की आयु 35 साल होती है। इसके बाद नियमानुसार उपयोग नहीं करना चाहिए। लेकिन, जानबुझकर ऐसे वैगनों का बेवजह उपयोग करती है। इस वजह कई बार मालगाड़ी दुर्घटना हो जाती है। नए वैगन का हर दो साल में नियमित ओवरहालिंग और प्रत्येक छह साल में बड़ी/विशेष ओवरहालिंग करानी पड़ती है। इसी तरह पुराने वैगन का प्रत्येक डेढ़ साल में ओवरहालिंग और साढ़े चार साल में विशेष ओवरहालिंग करना होता है।
गार्ड केबिन में सूख रहे कपड़े
जर्जर वैगन वाली मालगाड़ी किस रेलवे की है, यह तो स्पष्ट नहीं हुआ। लेकिन, इसके गार्ड केबिन की बदहाल स्थिति ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे थे। केबिन के सामने की ओर कपड़े सूखते नजर आए। मालगाड़ी के गार्ड केबिन में इस तरह कपड़े सूखते देखना आम दृश्य नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केबिन का उपयोग किस स्थिति में हो रहा है और वहां रखरखाव की स्थिति कितनी खराब है। जर्जर वैगन के साथ गार्ड केबिन की यह तस्वीर रेलवे की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाती है।
मालगाड़ी हो या कोचिंग ट्रेन, सुरक्षित परिचालन रेलवे की प्राथमिकता रहती है। ढक्कन बंद रहने चाहिए, यदि तार बांधकर या आधे खुले स्थिति में हैं तो यह उचित नहीं है। जांच कराई जाएगी। यदि मालगाड़ी दूसरी रेलवे की है तो उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी। - अनुराग कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम बिलासपुर रेल मंडल