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लिव-इन रिलेशनशिप से लेकर साइबर सुरक्षा तक: बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने किया जनजागरूकता फिल्मों का विमोचन

बिलासपुर पुलिस ने 'चेतना अभियान' के तहत लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी जटिलताओं, यातायात नियमों के महत्व और साइबर धोखाधड़ी से बचने के उपायों पर तीन लघु फि...और पढ़ें

By Mohammad Safraj MemonEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 11:40:15 AM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 11:40:15 AM (IST)
लिव-इन रिलेशनशिप से लेकर साइबर सुरक्षा तक: बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने किया जनजागरूकता फिल्मों का विमोचन
फिल्म विमोचन के दौरान एसएसपी रजनेश सिंह व फिल्म के कलाकार और अतिथि

HighLights

  1. 'चेतना अभियान' के तहत तीन लघु फिल्मों से युवाओं को मिला सतर्कता का पाठ।
  2. पुलिस की लघु फिल्म ने दिखाई आईना, यातायात नियमों के पालन की अपील।
  3. : साइबर ठगी से बचने के लिए बिलासपुर पुलिस ने जारी किया जागरूकता वीडियो।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पुलिस के चेतना अभियान के तहत समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई तीन लघु फिल्मों का बुधवार को चेतना भवन, पुलिस ग्राउंड में विमोचन किया गया। इस दौरान एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि युवाओं को किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझने जरूरत है। फिल्मों में लिव-इन रिलेशनशिप, यातायात सुरक्षा और साइबर अपराध जैसे समसामयिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

आरआइ भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि लिव-इन रिलेशनशिप पर आधारित फिल्म में युवाओं को किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले उसके सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं को समझने का संदेश दिया गया। वहीं यातायात जागरूकता फिल्म में सड़क पर स्टंट और लापरवाही से वाहन चलाने के दुष्परिणाम दिखाते हुए सुरक्षित यातायात नियमों के पालन की अपील की गई। साइबर अपराध पर आधारित फिल्म में स्कूली विद्यार्थियों ने आनलाइन ठगी, फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्राड और डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के उपायों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में फिल्मों से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम का सम्मान भी किया गया।


सम्मानित होने वालों में फिल्म निर्देशक डा. राहुल पारीक, असिस्टेंट डायरेक्टर आकांक्षा सिंह राठौड़, किशन यादव, श्रावणी नायडू, अशोक उपाध्याय, शत्रुघ्न जसवानी तथा मेकअप आर्टिस्ट दीपांशी घोष शामिल रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसएसपी राजनेश सिंह रहे। इस अवसर पर डा. विनोद तिवारी, लेफ्टिनेंट कर्नल डा. अंकुल ठकराल, जेके कालेज के सेक्रेटरी डा. इरशाद खान, डायरेक्टर डा. आशीष सिंह, एएसपी मधुलिका सिंह, एएसपी रामगोपाल करियारे सहित पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद्, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। मंच संचालन सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक उमाशंकर पांडेय ने किया। अंत में बिलासपुर पुलिस ने कहा कि चेतना अभियान के माध्यम से भविष्य में भी सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर जनजागरूकता कार्यक्रम और लघु फिल्मों का निर्माण जारी रहेगा।

लिव-इन रिलेशनशिप पर सोच-समझकर लें निर्णय

बिलासपुर पुलिस की लघु फिल्म में युवाओं को लिव-इन रिलेशनशिप के सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक पहलुओं से अवगत कराया गया। फिल्म का संदेश है कि केवल आकर्षण या भावनात्मक आवेग में कोई भी बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए। किसी भी रिश्ते में आने से पहले उससे जुड़ी जिम्मेदारियों, कानूनी प्रावधानों और भविष्य में होने वाले संभावित प्रभावों को समझना जरूरी है। फिल्म यह भी बताती है कि जागरूकता और सही निर्णय ही भविष्य की परेशानियों से बचा सकते हैं। पुलिस का उद्देश्य युवाओं को उपदेश देना नहीं, बल्कि उन्हें सही जानकारी देकर जिम्मेदार फैसले लेने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे अपने जीवन में अनावश्यक विवादों और कानूनी समस्याओं से बच सकें।

स्टंट नहीं, सुरक्षित ड्राइविंग ही असली स्मार्टनेस

यातायात जागरूकता पर आधारित फिल्म में सड़क पर स्टंट करने और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के खतरों को दर्शाया गया। फिल्म में बताया गया कि इंटरनेट मीडिया पर लोकप्रिय होने या रोमांच के लिए किए जाने वाले स्टंट कई बार जानलेवा साबित होते हैं। इससे न केवल वाहन चालक बल्कि सड़क पर चलने वालों की जान भी खतरे में पड़ती है। फिल्म युवाओं से हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाने की अपील करती है। फिल्म विमोचन के दौरान एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

साइबर ठगी से बचने का दिया व्यवहारिक संदेश

साइबर अपराध पर आधारित लघु फिल्म में स्कूली विद्यार्थियों ने डिजिटल ठगी के सामान्य तरीकों और उनसे बचाव के उपायों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। फिल्म में बताया गया कि फर्जी लिंक, फिशिंग काल, ओटीपी साझा करना, नकली निवेश योजनाएं और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली धोखाधड़ी से किसी भी व्यक्ति की मेहनत की कमाई पलभर में खत्म हो सकती है। लोगों से अपील की गई कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है।