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हाई कोर्ट सख्त: डर के साये से उम्मीद की ओर, बालोद के एक परिवार ने दिया बेबस भाई-बहन को नया आशियाना

दुष्कर्म का शिकार हुए दो नाबालिग भाई-बहन ने अपनी सौतेली बहन और उसके आरोपी पति के पास जाने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देश पर अंबिकापुर में क...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 01 Sep 2026 10:16:43 PM (IST)Updated Date: Tue, 01 Sep 2026 10:16:43 PM (IST)
हाई कोर्ट सख्त: डर के साये से उम्मीद की ओर, बालोद के एक परिवार ने दिया बेबस भाई-बहन को नया आशियाना

HighLights

  1. दुष्कर्म पीड़ित भाई-बहन को एक साथ गोद लेगा बालोद का परिवार।
  2. सौतेली बहन के पति पर दुष्कर्म का आरोप, बच्चों का इनकार।
  3. अंबिकापुर में शत-प्रतिशत उपस्थिति के साथ पढ़ाई कर रहे दोनों बच्चे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः दुष्कर्म के आरोपों और असुरक्षा के माहौल से बाहर निकाले गए दो नाबालिग भाई-बहन अब अपने भविष्य को लेकर पहली बार उम्मीद भरी राह पर खड़े हैं। दोनों ने सौतेली बहन और उसके पति के पास लौटने से साफ इन्कार करते हुए एक साथ सुरक्षित परिवार में रहने की इच्छा जताई है। हाई कोर्ट की निगरानी में बालोद का एक पात्र परिवार उन्हें साथ रखने के लिए आगे आया है। फिलहाल काउंसलिंग और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

बालोद जिले का एक पात्र देखभाल परिवार दोनों भाई-बहन को एक साथ रखने के लिए तैयार हुआ है। संबंधित परिवार के साथ मूल्यांकन और काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। कोर्ट ने राज्य सरकार से उस दिन तक दोनों बच्चों के फोस्टर केयर प्लेसमेंट की ताजा स्थिति बताने को कहा है।


अलग-अलग संस्थानों में हैं बच्चे

मामले की याचिकाकर्ता और नाबालिग की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बच्चों से संबंधित राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि दोनों बच्चों ने बार-बार महिला और उनके पति के पास लौटने की इच्छा से इन्कार किया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें फिलहाल अलग-अलग चाइल्ड केयर संस्थानों में रखा गया है। कलेक्टर, सरगुजा की ओर से दाखिल ताजा अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, बालक कक्षा पांचवीं और बालिका सातवीं में अंबिकापुर में अध्ययनरत है। दोनों की स्कूल उपस्थिति 100 प्रतिशत बताई गई है।

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निगरानी की है विशेष व्यवस्था

जिला प्रशासन ने हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन में दोनों स्कूलों को विशेष सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। सौतेली बहन और पति या किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को स्कूल या चाइल्ड केयर संस्थान में प्रवेश करने पर रोक लगाई गई है। बच्चों की निगरानी के लिए 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे और विजिटर रजिस्टर की व्यवस्था की गई है। प्रशासन के अनुसार, दोनों बच्चों को पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रतिदिन 2100 किलो कैलोरी वाला हाई-प्रोटीन और हाई-कैलोरी आहार दिया जा रहा है। अंबिकापुर मेडिकल कालेज अस्पताल में हुई जांच में दोनों बच्चों का स्वास्थ्य संतोषजनक पाया गया है।

चिंता और भय में आई कमी

क्लिनिकल साइकोलाजिस्ट द्वारा लगातार काउंसलिंग कराई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, बालक में चिंता और भय में कमी आई है, जबकि बालिका अब सहज और आत्मविश्वासी पाई गई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर दोनों भाई-बहन की नियमित मुलाकात भी कराई जा रही है।

इस आधार पर दंपती का चयहन

जिला बाल संरक्षण इकाई ने 23 संभावित देखभाल वाले अभिभावकों की सूची तैयार की थी, जिसमें से 20 पात्र दंपतियों की संशोधित सूची प्रस्तुत की गई। बालोद जिले के एक पात्र परिवार ने दोनों भाई-बहन को एक साथ रखने में सकारात्मक रुचि दिखाई है। हाई कोर्ट में राज्य ने बताया कि बच्चों को एक ही परिवार में साथ रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी।

यह है मामला

यह मामला तब शुरू हुआ जब बच्चों की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। बच्चों ने कोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता के पति ने उनके साथ दुष्कर्म किया है, जिसके कारण वे बाल गृह में रह रहे हैं। इस जानकारी के बाद हाई कोर्ट ने बच्चों को सुरक्षित आशियाने में रखने का निर्णय लिया।