
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल के कथित हैकिंग और सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने शुक्रवार देर शाम तक अपनी जांच प्रक्रिया पूरी कर ली। समिति ने पूरे प्रकरण के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि समिति शनिवार को यह रिपोर्ट कुलसचिव को सौंप सकती है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में वास्तव में प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई है अथवा नहीं। जांच पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई है और अधिकारी पूरे घटनाक्रम को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित की अगुवाई में गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में प्रो. एससी श्रीवास्तव, प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, प्रो. भारती अहिरवार और टीपी सिंह शामिल हैं। समिति के सदस्य शुक्रवार को भी पूरे दिन मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच में जुटे रहे।
जांच के दौरान समिति ने समर्थ पोर्टल से संबंधित तकनीकी गतिविधियों, लॉगिन रिकॉर्ड और एक्सेस हिस्ट्री की गहन समीक्षा की। इसके साथ ही संबंधित फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों के बयान भी दर्ज किए गए। समिति ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि किस अधिकारी, कर्मचारी या संकाय सदस्य ने किस स्थान से पोर्टल को एक्सेस किया और प्रश्नपत्रों से संबंधित फाइलों तक किस यूजर आइडी के माध्यम से पहुंच बनाई गई।
समर्थ पोर्टल के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों और समन्वयकों के संयुक्त ढांचे के अधीन है। पोर्टल के मुख्य समन्वयक के रूप में डीएसडब्ल्यू डॉ. शैलेंद्र कुमार कार्यरत हैं, जो पूर्व में कुलसचिव का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
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उनके साथ मनोज कुमार को-कोआर्डिनेटर के रूप में जुड़े हुए हैं, जबकि कपिल नागवंशी और सुरेश शर्मा सह-समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा परीक्षा नियंत्रक कार्यालय और विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग को भी पोर्टल का अधिकृत एक्सेस प्राप्त है।
जांच समिति का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि प्रश्नपत्रों से जुड़ी फाइलों तक पहुंच किस प्रक्रिया और किन परिस्थितियों में संभव हुई। समिति ने यह भी जांचा कि पोर्टल का उपयोग किस स्तर पर और किन यूजर आइडी के जरिए किया गया।
अब पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यह भी पता चल पाएगा कि किसी स्तर पर सुरक्षा में चूक हुई थी या नहीं।